Samastipur News: स्थानीय मंडल कारा (जेल) में बंद एक 30 वर्षीय विचाराधीन बंदी (Under-trial Prisoner) की सोमवार की रात अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. मृतक की पहचान जिले के हलई थाना क्षेत्र अंतर्गत बाजितपुर करनौल वार्ड संख्या एक निवासी बटोही महतो के पुत्र सुधीर महतो उर्फ बाबा के रूप में की गई है. कस्टडी में हुई इस मौत के बाद जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. देर रात ही कारा प्रशासन द्वारा स्थानीय पुलिस और मृतक के परिजनों को घटना की आधिकारिक सूचना दी गई, जिसके बाद परिजनों ने पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
मेडिकल टीम की मौजूदगी में कराया जा रहा पोस्टमार्टम
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. रात में ही रोते-बिलखते परिजन समस्तीपुर सदर अस्पताल पहुंचे. कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के नियमों के तहत शव के पोस्टमार्टम के लिए एक विशेष मेडिकल टीम (बोर्ड) का गठन किया गया है. इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक दंडाधिकारी (Magistrate) की भी प्रतिनियुक्ति की गई है, जिनकी प्रत्यक्ष निगरानी और वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है.
काराधीक्षक ने दी सफाई
घटना के संदर्भ में जमीनी और प्रशासनिक कड़ियों को जोड़ते हुए मंडल कारा के काराधीक्षक (Jail Superintendent) प्रशांत ओझा ने जेल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने रखा है. उन्होंने बताया कि:
- गिरफ्तारी और जेल: पिछले 31 मई 2026 को उत्पाद थाना पटोरी की टीम ने शराब तस्करी के आरोप में सुधीर महतो उर्फ बाबा को गिरफ्तार किया था, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में मंडल कारा भेजा गया था.
- अत्यधिक शराब सेवन की लत: काराधीक्षक के अनुसार, जेल की ड्योढ़ी पर आने के वक्त से ही सुधीर की तबीयत काफी खराब थी. उसे तुरंत सदर अस्पताल ले जाया गया था, जहां शुरुआती चिकित्सीय परीक्षण (Medical Check-up) में डॉक्टरों ने उसे अत्यधिक शराब के सेवन का आदी (क्रॉनिक अल्कोहलिक) बताया था.
- अचानक बिगड़ी तबीयत: सदर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद स्थिति सामान्य होने पर उसे वापस मंडल कारा के अस्पताल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा था. इसी क्रम में सोमवार की शाम अचानक उसकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई, जिसके बाद उसे आनन-फानन में दोबारा सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां देर रात इलाज के क्रम में उसने दम तोड़ दिया.
परिजनों का आरोप- बेरहम मारपीट से गई जान
दूसरी तरफ, जेल प्रशासन की इस थ्योरी को मृतक के परिजनों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है. सदर अस्पताल पहुंचे आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त करते हुए सीधा आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी के दौरान और उसके बाद पुलिस व उत्पाद विभाग के कर्मियों ने सुधीर के साथ बेरहमी से मारपीट की थी. परिजनों का कहना है कि पुलिसिया पिटाई के कारण आए गंभीर आंतरिक जख्मों और शारीरिक प्रताड़ना की वजह से ही सुधीर की मौत हुई है. परिजनों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच करने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा.
समस्तीपुर से अंकुर कुमार की रिपोर्ट
