समस्तीपुर: एफएमजीई और इंटर्नशिप के नियमों में फंसा विदेशी मेडिकल छात्रों का करियर, बढ़ी मुश्किल

Samastipur News: विदेश से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए भारत में डॉक्टर बनना आसान नहीं है. एफएमजीई परीक्षा, सख्त एनएमसी नियम, अनिवार्य इंटर्नशिप और कम पासिंग प्रतिशत के कारण हजारों छात्रों का सपना और भविष्य संकट में फंस रहा है. पढे़ं पूरी खबर…

समस्तीपुर से गिरिजा नन्दन शर्मा की रिपोर्ट

Samastipur News: समस्तीपुर समेत देश के हजारों छात्र हर साल डॉक्टर बनने का सपना लेकर रूस, यूक्रेन, चीन, किर्गिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों में एमबीबीएस की पढ़ाई करने जाते हैं. परिवार अपनी जमा-पूंजी, जमीन और बैंक लोन के सहारे बच्चों को विदेश भेजते हैं. लेकिन डिग्री लेकर भारत लौटने के बाद इन छात्रों के सामने असली संघर्ष शुरू होता है. डॉक्टर बनने की राह में एफएमजीई परीक्षा और एनएमसी के नियम बड़ी चुनौती बनकर सामने आते हैं.

एफएमजीई पास करना अनिवार्य

विदेश से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को भारत में प्रैक्टिस करने से पहले फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) पास करना जरूरी होता है. यह परीक्षा नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन साल में दो बार आयोजित करता है. कुल 300 अंकों की इस परीक्षा में कम से कम 150 अंक हासिल करना अनिवार्य है.

कम पासिंग प्रतिशत बढ़ा रहा परेशानी

इस परीक्षा का परिणाम अक्सर छात्रों के लिए निराशाजनक साबित होता है. हर साल बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन पास होने वालों का प्रतिशत 15 से 20 फीसदी के बीच रहता है. कई छात्र महज दो से चार अंकों से पीछे रह जाते हैं, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक जाता है.

परीक्षा के बाद भी खत्म नहीं होती चुनौती

एफएमजीई पास करने के बाद भी छात्रों को एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी पड़ती है. कोरोना काल और यूक्रेन युद्ध के बाद एनएमसी ने नियम और सख्त कर दिए हैं. कुछ मामलों में छात्रों को दो से तीन साल तक अतिरिक्त प्रशिक्षण और इंटर्नशिप भी करनी पड़ रही है.

आर्थिक बोझ और मानसिक दबाव

अभिभावकों का कहना है कि 30 से 40 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी कई छात्र वर्षों तक परीक्षा और इंटर्नशिप के चक्र में फंसे रहते हैं. लगातार असफलता, बढ़ता कर्ज और भविष्य की अनिश्चितता छात्रों और परिवारों दोनों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन रही है.

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लेखक के बारे में

Published by: Aniket Kumar

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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