420 किलो वजन उठाकर स्मिता कुमारी ने रचा इतिहास, बनीं स्ट्रॉन्ग वूमेन ऑफ द टूर्नामेंट की सेकेंड रनर-अप

बिहार की स्मिता कुमारी ने राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया. जानिए उनकी प्रेरणादायक सफलता की कहानी.

Samastipur News: जब इरादे बुलंद हों तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है. दलसिंहसराय प्रखंड के सलखनी गांव की रहने वाली और दो बेटियों की मां स्मिता कुमारी ने 45 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर शानदार उपलब्धि हासिल की है. बिहार सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी स्मिता ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित राष्ट्रीय मास्टर क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर बिहार का गौरव बढ़ाया.

420 किलो वजन उठाकर जीते दो गोल्ड और एक सिल्वर

76 किलोग्राम भार वर्ग की क्लासिक श्रेणी में स्मिता कुमारी ने स्क्वाट में 155 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया. वहीं बेंच प्रेस में 95 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने दूसरा स्वर्ण पदक जीता. डेडलिफ्ट में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया.

तीनों स्पर्धाओं में स्मिता ने कुल 420 किलोग्राम भार उठाकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया. प्रतियोगिता में उन्हें प्रतिष्ठित 'स्ट्रॉन्ग वूमेन ऑफ द टूर्नामेंट' श्रेणी में सेकेंड रनर-अप भी घोषित किया गया.

बिहार सरकार के अधिकारियों ने किया सम्मानित

स्मिता की इस उपलब्धि पर बिहार सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव नवीन कुमार और विभागीय निदेशक अनिल कुमार ने उन्हें सम्मानित किया. अधिकारियों ने उनकी सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में भी जीता था सिल्वर

स्मिता कुमारी की यह पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है. इससे पहले उन्होंने सीनियर नेशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप-2026 में भी शानदार प्रदर्शन किया था. प्रतियोगिता में उन्होंने बेंच प्रेस में 92.5 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता था.

उस प्रतियोगिता में स्मिता ने स्क्वाट में 140 किलोग्राम, बेंच प्रेस में 92.5 किलोग्राम और डेडलिफ्ट में 172.5 किलोग्राम सहित कुल 405 किलोग्राम भार उठाया था.

हॉकी और एथलेटिक्स में भी बना चुकी हैं पहचान

जनवरी 1984 में जन्मी स्मिता कुमारी पिछले करीब 16 वर्षों से बिहार सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में सेवाएं दे रही हैं. खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनकी सरकारी सेवा में नियुक्ति हुई थी.

स्मिता मूल रूप से राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी रही हैं. वर्ष 2008 में एथलेटिक्स की लंबी कूद स्पर्धा में भी उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था.

सात महीने पहले शुरू किया पावरलिफ्टिंग का प्रशिक्षण

परिवार और सरकारी नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच स्मिता ने करीब सात महीने पहले ही पावरलिफ्टिंग का नियमित प्रशिक्षण शुरू किया था. कम समय में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी पहचान बनाई.

हाल ही में आयोजित सिविल सर्विस नेशनल गेम्स में भी उन्होंने रजत पदक जीता. इसके अलावा कई निजी प्रतियोगिताओं में वह 'स्ट्रॉन्गेस्ट वूमन' का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं.

पति ने हर कदम पर बढ़ाया हौसला

स्मिता कुमारी की सफलता में उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनके पति जितेंद्र कुमार विभूतिपुर प्रखंड के उच्च विद्यालय टभका में शारीरिक शिक्षक हैं. उन्होंने स्मिता को हर कदम पर प्रोत्साहित किया और उनके खेल सफर में लगातार सहयोग दिया.

ये भी पढ़ें: शिवराम पंचायत में पेयजल संकट गहराया, ग्रामीणों ने PHED पर लगाया लापरवाही का आरोप


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Subhit kumar singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >