Samastipur : कॉलेजों की प्रयोगशाला में सुरक्षा मानकों की होगी जांच

कॉलेजों की प्रयोगशाला में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच होगी.

समस्तीपुर . कॉलेजों की प्रयोगशाला में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच होगी. कॉलेजों में प्रयोगशाला में सुरक्षा मानक को लेकर औचक जांच की तैयारी की है. इसके लिए शिक्षा विभाग मुख्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर कमेटी बनेगी. कमेटी के सदस्यों में रसायन, भौतिकी, जीवविज्ञान और वनस्पति शास्त्र के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे. शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन को कॉलेजों की प्रयोगशालाओं में सुरक्षा मानक की अनदेखी की शिकायतें मिलने के बाद जांच की तैयारी की गई है. इस मामले में एक बार नई सरकार में नियुक्त होने वाले शिक्षा मंत्री से भी विमर्श किया जायेगा. माना जा रहा है कि तीन माह के अंदर रैंडम जांच शुरू हो सकती है. कॉलेजों की प्रयोगशाला में सुरक्षा मानक के अनुसार व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण जैसे लैब कोट, चश्मा व दस्ताने पहनना अनिवार्य हैं. साथ ही यह भी निर्देश है कि प्रयोगशाला में अनिवार्य रूप से अग्निशमन की व्यवस्था हो, ताकि आग लगने की स्थिति में भी तुरंत काबू पाया जा सके. प्रयोगशाला में खतरनाक रसायनों को सही और सुरक्षित तरीके से संभाल कर रखना जरूरी है. प्रयोगशाला में विभिन्न प्रकार की गैस, इथाइल और मिथाइल गैस आदि को सुरक्षित तरीके से रखना होता है. छात्र और छात्राओं को प्रयोगशाला में कार्य करने के दौरान किस तरह की सावधानी रखनी है, इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की है. इससे इतर जिले में कॉलेजों की शिक्षा व्यवस्था बदहाली के दौर से गुजर रही है. खासकर विज्ञान विषयों में यह बदहाली ज्यादा है. विज्ञान प्रयोग पर आधारित विषय है, लेकिन कॉलेजों में प्रयोगशाला अनुदेशकों सहित अन्य पद खाली हैं. अगर किसी कॉलेज या विवि के किसी विज्ञान विभाग में प्रयोगशाला में अनुदेशक हैं, तब उनकी आनुपातिक व्यवस्था नहीं है. बदहाली के इस आलम में हर साल हजारों छात्र विज्ञान में बिना प्रयोगशाला गए उत्तीर्ण हो रहे हैं. यह अव्यवस्था हमारी नई पौध को बरबाद कर रही है. सोचा जा सकता है, हम कैसे उत्तीर्ण छात्रों की फौज तैयार कर रहें है, जिसने न कभी परखनली देखी है और न ही टेस्ट-ट्यूब. लेकिन आश्चर्य का विषय है कि उन सभी छात्रों को प्रयोग में न्यूनतम 70- 90 फीसदी अंक मिलते हैं. मिली जानकारी के मुताबिक विज्ञान विषयों जूलॉजी, बॉटनी, रसायनशास्त्र, भौतिकी के अलावा भूगोल व मनोविज्ञान में भी लैबोरेटरी होते हैं. प्रत्येक लैब में लैब तकनीशियन या लैब असिस्टेंट की जरूरत होती है. कॉलेजों के लिए सरकार का 30 छात्रों के अनुपात पर एक पद की स्वीकृति प्रदान की गई थी. केवल लैब पर्सनल की कमी का ही रोना नहीं है. छात्र��ं की संख्या दोगुना से अधिक बढ़ी, पर लैब का आकार वही है.

अंक देने का माध्यम रह गया लैब

जब अंगीभूत कॉलेजों की यह बदहाली है, तब संबद्धताप्राप्त कॉलेजों की हालत समझी जा सकती है. लैब अब मात्र अंक देने का माध्यम बनकर रह गया है. विगत कई वर्षों से सभी महाविद्यालयों में नामांकित इंटर से लेकर स्नातक स्तर तक के छात्र छात्राओं को प्रयोगशाला का लाभ नहीं मिल रहा है. महाविद्यालयों के विज्ञान प्रयोगशालाओं में गैस की कमी केमिकल की कमी उपकरणों की कमी एवं लैब बाय/प्रयोगशाला प्रदर्शक की कमी विगत कई वर्षों से है. इन संसाधनों की कमी से महाविद्यालयों में प्रयोगशाला क्लास का आयोजन विगत कई वर्षों से नहीं हो रहा है. संसाधनों की कमी के कारण विश्वविद्यालय द्वारा संचालित हो रही विभिन्न परीक्षाओं पर इसका प्रतिकूल असर पड रहा है. सभी महाविद्यालयों के विज्ञान विषय के शिक्षकों ने प्रयोगशालाओं में इन कमियों की सूचना अपने-अपने महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य को अनेक बार दी. यहां तक की कुछ महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य को प्रयोगशालाओं में उपकरणों की कमी गैस की कमी केमिकल की कमी की सूचना पूर्व में कई प्रधानाचार्य को दी. लेकिन आज तक इन संसाधनों की कमी को पूरा नहीं किया गया.

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Published by: Ankur kumar

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