समस्तीपुर: रोसड़ा नगर परिषद की राजस्व वसूली 9% पर सिमटी, चार प्रमुख स्रोतों से शून्य कमाई

रोसड़ा नगर परिषद वित्तीय संकट में है, चालू वित्तीय वर्ष में राजस्व लक्ष्य का केवल 9% ही हासिल किया है. शॉप रेंट, बस स्टैंड, और भवन निर्माण शुल्क जैसे प्रमुख स्रोतों से आय शून्य है, जिससे विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका है.

Samastipur News: समस्तीपुर जिले की रोसड़ा नगर परिषद की वित्तीय स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है. नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में नगर परिषद अपने वार्षिक राजस्व लक्ष्य का सिर्फ 9 फीसदी ही हासिल कर सकी है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शॉप रेंट, बस स्टैंड, भवन निर्माण अनुमति शुल्क और अन्य स्रोतों से अब तक एक रुपये की भी आय नहीं हुई है. ऐसे में नगर परिषद के विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.

15.59 लाख की वसूली

नगर परिषद ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 1 करोड़ 74 लाख 5 हजार 95 रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया था. लेकिन अब तक केवल 15 लाख 59 हजार 439 रुपये की ही वसूली हो सकी है. यानी वित्तीय वर्ष का बड़ा हिस्सा बीत जाने के बावजूद कुल उपलब्धि महज 9 प्रतिशत पर सिमट गई है.

चार प्रमुख मदों से शून्य आय

रिपोर्ट के अनुसार शॉप रेंट, बस स्टैंड शुल्क, भवन निर्माण अनुमति शुल्क और अन्य मदों से अब तक एक भी रुपये की वसूली नहीं हुई है. इन चारों मदों में 0 प्रतिशत राजस्व संग्रह ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और कर संग्रह व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

होल्डिंग टैक्स का खराब प्रदर्शन

ट्रेड लाइसेंस से 14 लाख रुपये के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 7,500 रुपये (1%) ही वसूले गए हैं. वहीं नगर परिषद की आय का प्रमुख स्रोत माने जाने वाले संपत्ति कर (होल्डिंग टैक्स) में 86.32 लाख रुपये के लक्ष्य के मुकाबले केवल 9.60 लाख रुपये (11%) की वसूली हो सकी है.

इसके अलावा पेयजल उपयोग शुल्क में 28.88 लाख रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 2.13 लाख रुपये (7%) ही जमा हुए हैं.

कचरा शुल्क में सबसे बेहतर प्रदर्शन

राजस्व संग्रह के सभी स्रोतों में कचरा प्रबंधन सेवा शुल्क का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा. इस मद में 21.65 लाख रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 3.78 लाख रुपये की वसूली हुई, जो करीब 17 प्रतिशत है. हालांकि यह भी तय लक्ष्य से काफी कम है.

विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर

नगर परिषद की धीमी राजस्व वसूली को लेकर आशंका जताई जा रही है कि यदि बकायेदारों से समय पर कर वसूली नहीं हुई और आय के अन्य स्रोत सक्रिय नहीं किए गए, तो विकास योजनाओं और नागरिक सुविधाओं पर सीधा असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय निकायों की आर्थिक मजबूती के लिए राजस्व संग्रह में तेजी लाना जरूरी है.

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