Samastipur News: रोसड़ा की भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीएलआर) कंचन कुमारी झा को रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने के बाद अब उनके घरेलू सहायक सुमित कुमार की भूमिका भी निगरानी जांच के केंद्र में है. निगरानी विभाग के अनुसार, सुमित करीब एक वर्ष से डीसीएलआर के यहां घरेलू सहायक के रूप में काम कर रहा था, लेकिन जमीन संबंधी मामलों में आने वाले लोगों और डीसीएलआर के बीच संपर्क की भूमिका निभाने के आरोप भी सामने आए हैं. जांच के दौरान एक अन्य पक्ष से कथित तौर पर सात लाख रुपये लिये जाने और उसके पक्ष में फैसला कराने की तैयारी की बात भी सामने आयी है. निगरानी टीम अब इस कथित लेनदेन के साथ जमीन विवाद से जुड़े अन्य मामलों के तार भी खंगाल रही है.
घरेलू सहायक की भूमिका पर उठे सवाल
निगरानी की कार्रवाई में दो लाख रुपये नकद और करीब 37 हजार रुपये की वाशिंग मशीन लेते डीसीएलआर कंचन कुमारी झा के साथ सुमित कुमार को भी गिरफ्तार किया गया था. जांच एजेंसी के अनुसार, सुमित करीब एक साल से डीसीएलआर के सरकारी आवास पर घरेलू सहायक के तौर पर काम कर रहा था.
हालांकि, जांच के दौरान उसकी भूमिका सिर्फ घरेलू कामकाज तक सीमित नहीं रहने के आरोप सामने आए हैं. जमीन संबंधी समस्याओं को लेकर डीसीएलआर कार्यालय पहुंचने वाले लोगों से उसके संपर्क में रहने की बात कही गयी है. आरोप है कि जमीन के मामलों में आने वाले लोगों को सुमित के माध्यम से डीसीएलआर तक पहुंचना पड़ता था.
सरकारी बैठकों में भी सुमित की मौजूदगी बनी जांच का हिस्सा
निगरानी जांच के दौरान सुमित की सरकारी कार्यालय से जुड़ी गतिविधियों को भी देखा जा रहा है. जानकारी के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को विभूतिपुर, बिथान और शिवाजीनगर अंचल के कर्मचारियों की बैठक में डीसीएलआर ने सभी कर्मियों को बाहर जाने को कहा था. इसके बावजूद सुमित के बैठक में मौजूद रहने की बात सामने आयी है.
इसी तरह 24 जुलाई को रोसड़ा, सिंघिया और हसनपुर अंचल के कर्मियों की बैठक के दौरान भी कर्मचारियों के बाहर चले जाने के बाद सुमित के डीसीएलआर से बातचीत करने की बात जांच में सामने आने का दावा किया गया है.
निगरानी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन बैठकों और जमीन संबंधी मामलों में सुमित की मौजूदगी की वास्तविक भूमिका क्या थी.
सात लाख के कथित लेनदेन ने बढ़ाई जांच की अहमियत
निगरानी अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में परिवादी के विपक्षी को लाभ पहुंचाने की कथित तैयारी की जा रही थी. आरोप है कि विपक्षी पक्ष से सात लाख रुपये लिये जाने के बाद उसके पक्ष में फैसला करने की तैयारी थी.
हालांकि, यह आरोप जांच का हिस्सा है और इसकी पुष्टि अनुसंधान पूरा होने के बाद ही हो सकेगी. निगरानी विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कथित सात लाख रुपये का लेनदेन किसके माध्यम से हुआ और इसमें सुमित की क्या भूमिका थी.
पांच लाख की मांग से शुरू हुई थी निगरानी की कार्रवाई
पूरा मामला विभूतिपुर थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव निवासी मनोज कुमार की शिकायत से सामने आया. मनोज कुमार का आरोप था कि भूमि विवाद निराकरण वाद संख्या 20/2026-27 में उनके पक्ष में फैसला कराने के एवज में पांच लाख रुपये नकद और एक वाशिंग मशीन की मांग की जा रही थी.
शिकायत के सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद निगरानी थाना में कांड संख्या 103/2026 दर्ज किया गया. इसके बाद डीएसपी नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में धावा दल का गठन किया गया.
ट्रैप में दो लाख और वाशिंग मशीन लेते पकड़े गये
निगरानी टीम ने ट्रैप के लिए परिवादी को रासायनिक पदार्थ लगे दो लाख रुपये उपलब्ध कराये. इसके अलावा टीम ने करीब 37 हजार रुपये की फ्रंट लोड वाशिंग मशीन खरीदी.
मनोज कुमार निगरानी टीम के सदस्यों के साथ वाशिंग मशीन लेकर डीसीएलआर के सरकारी आवास पहुंचे. आरोप के अनुसार, जैसे ही दो लाख रुपये और वाशिंग मशीन सुमित कुमार को सौंपी गयी, निगरानी टीम ने धावा बोल दिया. मौके पर डीसीएलआर कंचन कुमारी झा भी मौजूद थीं. इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया.
आवास से मिले 13.82 लाख रुपये भी जांच के दायरे में
गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने डीसीएलआर के सरकारी आवास की तलाशी ली. तलाशी के दौरान 13 लाख 82 हजार रुपये अतिरिक्त नकद बरामद होने की जानकारी दी गयी है.
अब इस रकम के स्रोत की भी जांच की जा रही है. निगरानी विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इतनी बड़ी रकम सरकारी आवास में कैसे पहुंची और इसका जमीन संबंधी मामलों में किसी कथित लेनदेन से कोई संबंध है या नहीं.
जांच पूरी होने के बाद साफ होगी तस्वीर
निगरानी की कार्रवाई के बाद डीसीएलआर कंचन कुमारी झा और सुमित कुमार को विशेष न्यायालय, निगरानी, मुजफ्फरपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया. मामले में आगे की अनुसंधान कार्रवाई जारी है.
गिरफ्तारी के बाद कंचन कुमारी झा ने मीडिया से बातचीत में अपने खिलाफ कार्रवाई को साजिश बताया था. अब निगरानी जांच में कथित रिश्वत, 13.82 लाख रुपये की बरामदगी और सात लाख रुपये के कथित लेनदेन समेत सुमित कुमार की भूमिका से जुड़े पहलुओं की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी.
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