Samastipur News:शांति केवल बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक भी होनी चाहिए : प्रो. दिलीप

राम निरीक्षण आत्मा राम महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजित किया गया.

Samastipur News:समस्तीपुर : राम निरीक्षण आत्मा राम महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में शांति, भाईचारे और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करना था. कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ. इसके बाद एनएसएस स्वयंसेवकों ने एनएसएस गीत प्रस्तुत किया, जिसने पूरे वातावरण को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया. प्रधानाचार्य प्रो. दिलीप कुमार ने कहा कि शांति केवल बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक भी होनी चाहिए. जब व्यक्ति स्वयं शांत होगा तभी समाज और राष्ट्र शांतिपूर्ण बन पायेगा. अशांति हमारे मन की उपज है ये कहीं बाहर से नहीं आती है. युवाओं की जिम्मेदारी है कि अशांति से बचें और मन में शांति को स्थापित करें. कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. प्रेमलता शर्मा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह युवाओं के लिए एक अवसर है कि वे समाज में शांति और सहयोग का संदेश फैलाएं. युवा पीढ़ी ही शान्ति निर्माण की असली शक्ति है. मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष संतोष कुमार ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि शांति सिर्फ एक दिन की चलने वाली प्रक्रिया नहीं बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसकी शुरुआत हमारे अन्दर से होती है. भाषण प्रतियोगिता का संचालन एनएसएस स्वयंसेवक आलोक कुमार ने किया. प्रतियोगिता का विषय था युवा और शान्ति निर्माण. प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए शांति, अहिंसा, सहिष्णुता और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया. प्रतियोगिता का मूल्यांकन निर्णायक मंडल, डॉ. अर्चना कुमारी, डॉ. दीपक नायर एवं डॉ. उमा शंकर द्वारा किया गया. निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों के भाषण के प्रभाव, प्रस्तुति और विषय की समझ के आधार पर अंक प्रदान किये. प्रथम स्थान शांभवी कुमारी, द्वितीय स्थान कन्हैया कुमार गुप्ता एवं तृतीय स्थान सानिवा प्रवीण ने प्राप्त किया. विजेताओं को प्राचार्य द्वारा मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. मौके पर डॉ. बबीना सिन्हा, डॉ. रत्न कृष्ण झा, डॉ. वीरेंद्र कुमार दत्ता, डॉ. जयचंद्र झा, डॉ. स्मिता कुमारी, डॉ. प्रणति, डॉ. माला आदि मौजूद थे.

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By KRISHAN MOHAN PATHAK

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