मोरवा में 20 से अधिक आंगनबाड़ी भवन बेकार, जर्जर झोपड़ियों में चल रहे केंद्र

समस्तीपुर में 20 से अधिक नवनिर्मित आंगनबाड़ी भवन वर्षों से उपयोग का इंतजार कर रहे हैं. सरकारी राशि से बने ये भवन खाली पड़े हैं, जबकि बच्चे आज भी जर्जर झोपड़ियों और किराये के भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं. ग्रामीणों में विभागीय उदासीनता को लेकर भारी नाराजगी है.

Samastipur News: मोरवा प्रखंड में सरकारी राशि से बने 20 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र भवन वर्षों से उपयोग का इंतजार कर रहे हैं. लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए इन भवनों में आज तक नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू नहीं हो सका है. दूसरी ओर कई केंद्र अब भी किराये के भवनों, निजी दरवाजों और जर्जर झोपड़ियों में संचालित हो रहे हैं. इसे लेकर ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ रही है.

बच्चों और महिलाओं के लिए बने थे भवन

जानकारी के अनुसार बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोंगर, मोरवा उत्तरी, मोरवा दक्षिणी, लड़ुआ और मरीचा समेत कई पंचायतों में आंगनबाड़ी केंद्र भवनों का निर्माण कराया गया था.

भवन तैयार होने के बावजूद उनमें अब तक नियमित गतिविधियां शुरू नहीं हो सकी हैं. कई भवन पूरी तरह खाली पड़े हैं, जबकि केंद्र पुराने और असुरक्षित भवनों से संचालित हो रहे हैं.

रखरखाव के अभाव में खराब हो रहे भवन

स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय उदासीनता के कारण लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है. लंबे समय से बंद पड़े भवनों का रखरखाव नहीं होने से उनकी स्थिति भी धीरे-धीरे खराब होती जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते इनका उपयोग शुरू नहीं कराया गया तो भवनों को नुकसान पहुंच सकता है.

जर्जर झोपड़ियों में पढ़ रहे छोटे बच्चे

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी भवन उपलब्ध होने के बावजूद कई आंगनबाड़ी केंद्र आज भी जर्जर झोपड़ियों और किराये के भवनों में संचालित किए जा रहे हैं. उनका कहना है कि बरसात के दिनों में झोपड़ियों के गिरने का खतरा बना रहता है, जिससे छोटे बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं.

लोगों ने मांग की है कि सभी नवनिर्मित भवनों में जल्द से जल्द आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू कराया जाए और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं.

सीडीपीओ पर उठाए सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले में अब तक सीडीपीओ श्वेता कुमारी की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है. उनका आरोप है कि सरकारी भवन होने के बावजूद किराये और जर्जर भवनों में केंद्र चलाना सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है. ग्रामीणों ने विभाग से तत्काल कार्रवाई कर बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.

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By Girija nandan sharma

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