Samastipur News:विद्यालयों में पाठ्य योजना बनाये बिना ही पाठ टीका का हो रहा संधारण

सरकारी स्कूलों में पठन पाठन व्यवस्था दुरुस्त हो व स्कूलों में पढ़ाई का वातावरण ठीक हो, इसके लिये कई उपाय किये गये हैं.

Samastipur News:समस्तीपुर : सरकारी स्कूलों में पठन पाठन व्यवस्था दुरुस्त हो व स्कूलों में पढ़ाई का वातावरण ठीक हो, इसके लिये कई उपाय किये गये हैं. लेकिन अधिकतर शिक्षक व एचएम विभागीय आदेश को दरकिनार करते पाए गए है. जिले के अधिकांश सरकारी स्कूलों में पाठ टीका का संधारण नहीं किया जाता है. अधिकतर शिक्षकों को तो यह भी नहीं पता कि पाठ टीका में क्या लिखना है. वही कई विद्यालयों में पाठ्य योजना बनाये बिना ही पाठ टीका का संधारण हो रहा है. एचएम सौरभ कुमार बताते है कि आदर्श शिक्षण के लिए पाठ टीका बहुत ही आवश्यक होता है. वर्ग में जाने से पूर्व पाठ टीका तैयार कर लेना चाहिए. पाठ टीका एक दर्पण होता है, जिसमें पाठ से संबंधित सभी आयाम स्पष्ट रूप से पाठ टीका में दिखना चाहिए. पाठ योजना को प्रभावी बनाने की प्रक्रिया को लचीला रखना होता है ताकि अध्यापक पढ़ाते समय अपने छात्रों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर शिक्षण-प्रक्रिया में बदलाव कर सकें. छात्रों और उनके पूर्व-ज्ञान को जानना, पाठ्यक्रम में आगे बढ़ने का अर्थ को जानना और छात्रों को सीखने में मदद करने के लिए सर्वोत्तम संसाधन खोज करना भी महत्त्वपूर्ण होता है.

एचएम करेंगे मूल्यांकन

सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के काम का अब मूल्यांकन होगा. इसके लिए संस्था प्रधान कार्यरत शिक्षकों के काम के हिसाब से एक प्रपत्र भरकर डीईओ को भेजेंगे. इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान के अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. हर शिक्षक का मूल्यांकन प्रपत्र भरा जायेगा. शिक्षक द्वारा खुद के काम का मूल्यांकन करने के बाद एचएम उसका सत्यापन करेंगे. इस प्रपत्र में शिक्षक को अपने एजुकेशन लेवल से लेकर नौकरी की पूरी जानकारी देनी होगी. इसमें बताना होगा कि नौकरी लगने के बाद कहां-कहां पदस्थापन रहा और कहां प्रतिनियुक्ति पर रहे. इसमें जिन शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई या कोई सम्मान मिला है तो वह भी लिखना होगा. प्रपत्र में संबंधित शिक्षक के स्कूल में आने-जाने का समय, पढ़ाने का तरीका, होमवर्क की स्थिति गत रिजल्ट भी दर्शाना होगा.

होमवर्क होगा मजेदार

डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि होमवर्क ऐसा होना चाहिए जो बच्चों को स्ट्रेस में न डाले. साथ ही इसे मजेदार बनाने के लिए क्रिएटिव, इंट्रेस्टिंग, पावरफुल, सही तरीके से प्लान किया हुआ, इंटरएक्टिव और बच्चों की स्किल्स में इजाफा करने के लिए टीचर्स इसे खुद डिजाइन करेंगे. छठी से लेकर आठवीं क्लास के बच्चों के लिए प्रैक्टिस, एक्सटेंशन ऑफ लर्निंग और क्रिएशन के अनुसार टीचर्स को एक्टिविटीज डिजाइन करने के लिए प्रेरित किया गया है. वही अभिभावक अगर होमवर्क ज्यादा मिला हो तो उसे टुकड़ों में पढ़ाने की कोशिश करें. हर बच्चा खुद में अलग होता है. कुछ बच्चों को दूसरों की तुलना में अधिक प्रेरणा और सहायता की आवश्यकता हो सकती है. ऐसे में बच्चे को होमवर्क करवाते समय उसके हर विषय को मजेदार और रोचक बनाने का प्रयास करें.

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Published by: Ankur kumar

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