Samastipur News: पूसा. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आईओटी आधारित स्मार्ट सिंचाई प्रणाली का मॉडल विकसित किया है. सीएईटी के वैज्ञानिक डॉ. सुदर्शन प्रसाद द्वारा विकसित यह प्रणाली खेत की मृदा नमी की वास्तविक समय में निगरानी करती है और मौसम के अल्पकालिक पूर्वानुमान के आधार पर सिंचाई का निर्णय लेती है. इससे जरूरत के अनुसार सिंचाई करने और अनावश्यक पानी के इस्तेमाल को कम करने में मदद मिल सकती है.
Pusa News: मिट्टी की नमी के हिसाब से खुद चलेगा सिंचाई पंप
इस स्मार्ट सिंचाई प्रणाली में मृदा नमी सेंसर का इस्तेमाल किया गया है. सेंसर खेत की मिट्टी में मौजूद नमी की लगातार निगरानी करता है और इसकी वास्तविक समय की जानकारी माइक्रोकंट्रोलर तक पहुंचाता है.
माइक्रोकंट्रोलर प्राप्त जानकारी के आधार पर मिट्टी में पानी की स्थिति का आकलन करता है. जब मृदा की नमी निर्धारित सिंचाई सीमा से नीचे पहुंचती है, तो सिस्टम स्वतः सिंचाई शुरू कर देता है.
नमी पर्याप्त होते ही अपने आप बंद हो जाएगा पंप
सिंचाई शुरू होने के बाद भी सिस्टम खेत की मिट्टी की नमी की निगरानी करता रहता है. जब नमी निर्धारित फील्ड कैपिसिटी सीमा तक पहुंच जाती है, तो पंप अपने आप बंद हो जाता है.
इस तरह पंप किसी तय समय तक चलाने के बजाय खेत की वास्तविक मृदा-जल स्थिति के आधार पर संचालित होता है. इससे जरूरत से अधिक सिंचाई से बचने में मदद मिल सकती है.
बारिश का पूर्वानुमान देखकर सिंचाई का फैसला करेगा सिस्टम
स्मार्ट सिंचाई प्रणाली को वाई-फाई के माध्यम से इंटरनेट से जोड़ा गया है. यह ओपन वेदर एपीआई से अल्पकालिक मौसम पूर्वानुमान की जानकारी प्राप्त करती है.
सिस्टम आगामी 12 घंटे में बारिश की संभावना का मूल्यांकन करता है. यदि बारिश की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक होती है और खेत की नमी सिंचाई सीमा से कम है, तो भी सिस्टम तत्काल सिंचाई शुरू नहीं करता. इसका उद्देश्य संभावित बारिश से पहले अनावश्यक पानी देने से बचना है.
मिट्टी सूखी और बारिश की संभावना नहीं तो खुद शुरू होगी सिंचाई
यदि खेत की मिट्टी निर्धारित सीमा से अधिक सूखी है और निकट भविष्य में बारिश की संभावना नहीं है, तो माइक्रोकंट्रोलर रिले को सक्रिय करता है. इसके बाद पंप स्वतः चालू होकर खेत की सिंचाई शुरू कर देता है.
इस व्यवस्था में वास्तविक समय की मृदा नमी और अल्पकालिक बारिश के पूर्वानुमान दोनों को एक साथ ध्यान में रखा जाता है.
ऑटो और मैनुअल दोनों मोड में चलेगी प्रणाली
स्मार्ट सिंचाई प्रणाली में ऑटो और मैनुअल दोनों ऑपरेटिंग मोड उपलब्ध हैं. ऑटो मोड में मृदा नमी और बारिश के पूर्वानुमान के आधार पर सिस्टम खुद सिंचाई का निर्णय लेता है.
वहीं मैनुअल मोड में उपयोगकर्ता जरूरत के अनुसार पंप को दूर से संचालित कर सकता है. इससे किसान को सिंचाई पर नियंत्रण का विकल्प भी मिलता है.
पारंपरिक सिंचाई से अलग है तकनीक
पारंपरिक समय आधारित सिंचाई व्यवस्था में पंप एक निर्धारित समय तक चलता है, चाहे खेत में पानी की वास्तविक जरूरत कितनी भी हो या बारिश की संभावना हो.
नई प्रणाली खेत की वर्तमान मृदा-जल स्थिति और निकट भविष्य के मौसम पूर्वानुमान को एक साथ ध्यान में रखती है. इससे अनावश्यक सिंचाई कम करने और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिल सकती है.
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