कक्षा से बाहर बच्चों ने सीखा कैमरा, विज्ञान और खेती का हुनर, लर्निंग फेस्टिवल ने बदला पढ़ाई का अंदाज

समस्तीपुर के लर्निंग फेस्टिवल ने बच्चों को कक्षा की दीवारों से बाहर निकलने का मौका दिया. सात अलग-अलग स्टूडियो में बच्चों ने कैमरा, पेंटिंग, विज्ञान, और किचन गार्डन जैसे विषयों में प्रयोग और सृजन करके सीखा. यह अनूठा आयोजन बच्चों की रचनात्मकता और आत्मविश्वास को बढ़ाने पर केंद्रित था.

Samastipur: क्षमतालय फाउंडेशन और बिहार शिक्षा परियोजना के संयुक्त प्रयास से चलाये जा रहे लर्निंग फेस्टिवल का उद्देश्य बच्चों को कक्षा की सीमाओं से बाहर सीखने, अपनी रुचियों और क्षमताओं को पहचानने तथा अपनी सीख को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर देना है. फेस्टिवल के दौरान बच्चों ने सात अलग-अलग स्टूडियो के माध्यम से सीखने, प्रयोग करने और सृजन करने का अनुभव प्राप्त किया.

सात स्टूडियो में बच्चों ने किया प्रयोग और सृजन

मीडिया स्टूडियो में बच्चों ने अपने आसपास की घटनाओं और कहानियों को समझते हुए उन्हें कैमरा, वीडियो और रिपोर्टिंग के माध्यम से प्रस्तुत करना सीखा. पेंटिंग स्टूडियो में बच्चों ने रंगों और चित्रों के माध्यम से अपनी कल्पनाओं, भावनाओं और विचारों को अभिव्यक्त किया.

बोर्ड गेम स्टूडियो में बच्चों ने स्वयं बोर्ड गेम तैयार किये. इसके माध्यम से उन्होंने समस्या समाधान, रणनीतिक सोच और सहयोग जैसे कौशल विकसित किये.

किचन गार्डन में सीखा पौधों की देखभाल का तरीका

किचन गार्डन स्टूडियो के माध्यम से बच्चों ने बीज बोने, पौधों की देखभाल करने और सब्जियां उगाने की प्रक्रिया को समझा. इस गतिविधि के जरिये बच्चों ने प्रकृति, पोषण और पर्यावरण से जुड़कर सीखने का अनुभव प्राप्त किया.

साइंस स्टूडियो में बच्चों ने सवाल पूछने और प्रयोग करने के साथ अपने आसपास होने वाली घटनाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया.

कहानी और नाटक के माध्यम से बढ़ा आत्मविश्वास

लिटरेचर एवं स्टोरी टेलिंग स्टूडियो में बच्चों ने कहानी, कविता और लेखन के माध्यम से अपनी कल्पनाओं और अनुभवों को अभिव्यक्त किया. वहीं नाटक स्टूडियो में बच्चों ने अभिनय और मंचन के माध्यम से संवाद, आत्मविश्वास और टीमवर्क जैसे कौशल विकसित किये.

फेस्टिवल के पहले पांच दिनों में बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने हाथों से अलग-अलग उत्पाद और प्रदर्शन तैयार किये. इनकी प्रस्तुति छठे दिन की गयी.

करके सीखने पर जोर

प्रोग्राम लीडर आसिफ अमीन ने बताया कि लर्निंग फेस्टिवल के माध्यम से बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तक आधारित सीख तक सीमित रखने के बजाय करके सीखने, प्रयोग करने, अपनी रुचियों और क्षमताओं को पहचानने तथा सृजन करने का अवसर मिलता है. इससे बच्चों में अपनी सीख को प्रस्तुत करने की क्षमता भी विकसित होती है और वे बचपन से ही इन गतिविधियों के प्रति जागरूक होते हैं.

तीन विद्यालयों में हुआ आयोजन

लर्निंग फेस्टिवल का आयोजन उमवि काले नरपतनगर, उमवि खरहैया और प्राथमिक विद्यालय रामपुर में कराया गया.

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By Krishana murari

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