Samastipur News: मोहिउद्दीननगर प्रखंड क्षेत्र से गुजरने वाली गंगा और वाया नदियों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी से दियारा क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ की आशंका बढ़ गई है. गंगा का जलस्तर 46.50 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान 45.50 मीटर से एक मीटर अधिक है. सोमवार को सुबह से शाम तक गंगा के जलस्तर में 20 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है.
Mohiuddinagar News: खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर पहुंची गंगा
गंगा के सरारी कैंप पर तैनात जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता मनीष कुमार गुप्ता ने सोमवार शाम बताया कि नदी का जलस्तर 46.50 मीटर दर्ज किया गया है. उन्होंने बताया कि सुबह से शाम तक 20 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले 12 घंटे में सबसे अधिक वृद्धि है.
अधिकारी के अनुसार फिलहाल जलस्तर की प्रवृत्ति बढ़ने की है, जिससे आने वाले समय में निचले इलाकों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
निचले इलाकों के सोते और ढाब जुड़ने लगे
गंगा के पानी में लगातार बढ़ोतरी के कारण दियारा क्षेत्र के निचले हिस्सों में पानी फैलने लगा है. कई स्थानों पर सोते और ढाब एक-दूसरे से जुड़ने लगे हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और दैनिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका है.
हजारों पशुपालकों के सामने चारे का संकट
गंगा और वाया नदियों के बढ़ते जलस्तर का सबसे अधिक असर पशुपालकों पर पड़ रहा है. मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र में हजारों पशुपालक पशु चारे के संकट से जूझने लगे हैं.
पशु चारे के लिए बोई गई कई फसलें पानी में डूबने के कारण सड़ने-गलने लगी हैं. इससे पशुओं के लिए सुरक्षित चारे की उपलब्धता की समस्या बढ़ रही है.
सड़े चारे से पशुओं को बीमारी का खतरा
ग्रामीणों के अनुसार पानी में लंबे समय तक डूबी रहने वाली चारा फसलें खराब हो रही हैं. ऐसे सड़े-गले चारे को पशुओं को खिलाने से उनके बीमार होने का खतरा बना रहता है.
पशुपालकों का कहना है कि यदि जलस्तर और बढ़ता है तो पशु चारे की समस्या और गंभीर हो सकती है. ऐसे में प्रशासन को वैकल्पिक चारे की व्यवस्था पर भी ध्यान देने की जरूरत है.
दियारा की हजारों आबादी पर फिर मंडराया संकट
गंगा के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि से दियारा क्षेत्र की हजारों की आबादी एक बार फिर बाढ़ की आशंका से चिंतित है. ग्रामीणों की नजर अब लगातार नदी के जलस्तर पर बनी हुई है.
जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी रहने पर निचले इलाकों में पानी और फैलने की आशंका जताई जा रही है.
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