समस्तीपुर: कृषि वैज्ञानिकों ने जारी किए महत्वपूर्ण सुझाव, जानें तिल और अरहर की सही तकनीक

कृषि वैज्ञानिकों ने धान के अयोग्य खेतों में तिल, अरहर, मिर्च और मिश्रीकंद की खेती करने की सलाह दी है. जानें खेती की पूरी वैज्ञानिक विधि और सही तरीका.

Agriculture News: बदलते मौसम और खरीफ सीजन की बढ़ती गतिविधियों के बीच समस्तीपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण समसामयिक सुझाव जारी किए हैं. विशेषज्ञों ने धान के लिए अनुपयुक्त खेतों के सही उपयोग से लेकर मशरूम उत्पादन तक के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी है.

धान के बिना जलभराव वाली जमीनों में तिल की बोआई

जिन ऊंची जमीनों में जलभराव न होने के कारण धान की खेती संभव नहीं है, वहां किसान इस सप्ताह के भीतर तिल की बोआई पूरी कर लें. इसके लिए 'कृष्णा', 'कालिका', 'कांके सफेद' और 'प्रगति (एमटी-75)' अनुशंसित किस्में हैं. बोआई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम थिरम से उपचारित करें. पौधों के बीच 30 गुणा 10-15 सेमी की दूरी रखें तथा प्रति हेक्टेयर 60 क्विंटल गोबर की खाद, 40 किग्रा नाइट्रोजन, 20 किग्रा फॉस्फोरस और 20 किग्रा पोटाश का प्रयोग करें.

अरहर और मिर्च की खेती के लिए वैज्ञानिक सलाह

अच्छी जल निकासी वाली ऊंची जमीनों में खरीफ अरहर की बोआई का यह सही समय है. किसान 'बहार', 'पूसा 9', 'राजेन्द्र अरहर 1' और 'राजेन्द्र अरहर 2' किस्मों का उपयोग 18-20 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से करें. बोआई से पूर्व बीजों को कार्बेन्डाजिम, क्लोरपायरीफॉस और राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें. इसके अलावा मिर्च की नर्सरी तैयार करने के लिए ऊंची क्यारियों का चुनाव करें और थिरम 75% डस्ट से बीजों का उपचार जरूर करें.

मिश्रीकंद, प्याज नर्सरी और मशरूम उत्पादन पर ध्यान

मिश्रीकंद की बोआई के लिए 'राजेन्द्र मिश्रीकंद 1 और 2' किस्मों का चुनाव कर 15-20 किग्रा बीज प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें. प्याज की 25-35 दिन पुरानी नर्सरी में निराई-गुड़ाई कर खरपतवार निकालें और बारिश से बचाव के लिए शेड नेट लगाएं. जुलाई अंत तक 'श्वेत दुधिया' मशरूम की बोआई पूरी करने के साथ ऑयस्टर मशरूम उत्पादन कक्ष की सफाई शुरू करने की सलाह दी गई है.


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Author: Girija nandan sharma

Published by: Sumit Kumar

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