Samastipur News: सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था को हाईटेक बनाने के उद्देश्य से लागू की गई फेशियल रिकग्निशन सिस्टम आधारित डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था फिलहाल तकनीकी खामियों के कारण पूरी तरह सफल नहीं हो सकी है. जिले के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने की प्रक्रिया सर्वर डाउन, लॉगिन समस्या और डेटा सेव नहीं होने जैसी परेशानियों से प्रभावित हो रही है.
तकनीकी गड़बड़ियों से परेशान शिक्षक
विद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कि प्रतिदिन टैबलेट के माध्यम से ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों की उपस्थिति दर्ज करनी होती है. इसके लिए विद्यार्थियों का चयन करने के बाद कक्षा की सामूहिक फोटो अपलोड करना अनिवार्य है. लेकिन कई बार ऐप लॉगिन नहीं होता, तो कई बार फोटो और डेटा अपलोड नहीं हो पाता. इससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.
विभाग और शिक्षकों के बीच बढ़ा आरोप-प्रत्यारोप
फेशियल रिकग्निशन व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को गूगल मीट के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया है. वहीं शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप से भी अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है. इस बीच करीब आधा दर्जन सरकारी टैबलेट गायब होने की जानकारी भी सामने आई है.
6074 टैबलेट के बाद भी व्यवस्था पटरी पर नहीं
जिले के सरकारी विद्यालयों में छात्रों के नामांकन के आधार पर दो से तीन टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं. कुल 6074 टैबलेट वितरित किए गए हैं, जिनमें ई-शिक्षाकोष सहित सभी आवश्यक ऐप पहले से इंस्टॉल हैं. विभाग का दावा था कि इस व्यवस्था से छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन और अन्य योजनाओं की निगरानी अधिक पारदर्शी होगी, लेकिन तकनीकी बाधाओं के कारण इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है.
डीईओ ने दिया समस्या दूर करने का भरोसा
जिला शिक्षा पदाधिकारी कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि योजना के प्रभावी संचालन के लिए तकनीकी समस्याओं की समीक्षा की जा रही है. जहां भी लॉगिन, सर्वर या डेटा सेविंग से जुड़ी दिक्कतें हैं, उन्हें तकनीकी टीम के माध्यम से जल्द दूर कराया जाएगा, ताकि सभी विद्यालयों में डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके.
