समस्तीपुर: मनरेगा योजनाओं की जांच करने पहुंची केंद्रीय टीम, 2 सितंबर तक चलेगा सत्यापन

समस्तीपुर के बिथान प्रखंड की सोहमा पंचायत में मनरेगा योजनाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए केंद्रीय टीम पहुंची है. यह टीम 2 सितंबर तक योजनाओं का भौतिक सत्यापन करेगी. रिपोर्ट से योजनाओं के क्रियान्वयन की हकीकत सामने आएगी.

समस्तीपुर: बिथान प्रखंड की सोहमा पंचायत में मनरेगा योजनाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए केंद्रीय टीम पहुंची है. ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की राष्ट्रीय स्तर की निगरानी टीम ने शनिवार को पंचायत की विभिन्न मनरेगा योजनाओं का स्थल निरीक्षण कर भौतिक सत्यापन शुरू किया. टीम ने योजनाओं से जुड़े अभिलेखों और धरातल पर हुए कार्यों का मिलान किया. जांच देर शाम तक जारी रही.

योजनाओं के अभिलेख और धरातल पर हुए काम का किया मिलान

जांच के दौरान टीम ने सोहमा उच्च विद्यालय परिसर समेत शिकायत में शामिल विभिन्न योजना स्थलों का निरीक्षण किया. अधिकारियों ने योजनाओं की वास्तविक स्थिति, निर्माण कार्य, मिट्टी भराई, निजी खेत पोखर, मजदूरी भुगतान, सूचना पट्ट, योजना से संबंधित फोटो और अन्य दस्तावेजों की जानकारी ली.

केंद्रीय टीम का मुख्य उद्देश्य अभिलेखों में दर्ज कार्य और मौके पर मौजूद स्थिति के बीच वास्तविकता की जांच करना है. इसके तहत योजनाओं के दस्तावेजों और स्थल पर हुए कार्य का मिलान किया जा रहा है.

2 सितंबर तक जारी रहेगी केंद्रीय जांच

केंद्रीय टीम के अनुसार, जांच की प्रक्रिया 2 सितंबर तक जारी रहेगी. इस दौरान शिकायत में शामिल पंचायत की अन्य मनरेगा योजनाओं का भी स्थल सत्यापन किये जाने की संभावना है.

जांच पूरी होने के बाद अभिलेखों, स्थल निरीक्षण और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जायेगी. इसी रिपोर्ट से योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी.

पूर्व की जांच में 20 योजनाओं में त्रुटियों का दावा

बताया जाता है कि सोहमा पंचायत की मनरेगा योजनाओं को लेकर पूर्व में भी विभिन्न स्तरों पर शिकायत और जांच हो चुकी है. आवेदनकर्ता प्रमोद कुमार यादव की शिकायत के अनुसार, पूर्व की जांच में 34 योजनाओं में से 20 में त्रुटियों का उल्लेख किया गया था. वहीं, अपीलीय सुनवाई के बाद 18 लाख 16 हजार 187 रुपये की वसूली का आदेश दिये जाने का भी दावा किया गया है.

शिकायत में निजी खेत पोखर, जॉब कार्ड, मजदूरी भुगतान, लाभुकों की पात्रता, भूमि स्वामित्व, योजना के फोटो, जियो-टैगिंग और सामग्री खरीद से जुड़े आरोप लगाये गये हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है.

केंद्रीय टीम की जांच के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रक्रियागत अनियमितता हुई है या नहीं. फिलहाल पंचायत में 2 सितंबर तक चलने वाली केंद्रीय जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं.

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By Krishan mohan pathak

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