Samastipur News: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने मिथिलांचल समेत पूरे देश के छात्रों को बड़ा सांस्कृतिक उपहार दिया है. बोर्ड ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से माध्यमिक स्तर यानी कक्षा 9वीं और 10वीं के पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को एक विषय के रूप में शामिल करने का आधिकारिक निर्णय लिया है.
शिक्षा व्यवस्था में मैथिली को मुख्यधारा में लाने के इस फैसले को शिक्षाविदों और भाषा प्रेमियों ने ऐतिहासिक और सराहनीय बताया है.
संस्कृति और भाषा को मिलेगा बढ़ावा
टेक्नो मिशन हाई स्कूल मोहनपुर रोड के प्राचार्य एके लाल ने कहा कि सीबीएसई के इस फैसले से मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी.
उन्होंने कहा कि मैथिली केवल भाषा नहीं, बल्कि लोक कला, साहित्य और संस्कृति की पहचान है. स्कूल स्तर पर इसकी पढ़ाई शुरू होने से नई पीढ़ी अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से जुड़ सकेगी.
छात्रों और अभिभावकों में उत्साह
इस फैसले का स्कूल प्रशासन, अभिभावकों और छात्रों ने स्वागत किया है.
सेंट्रल पब्लिक स्कूल के निदेशक सह प्राचार्य मो. आरिफ ने कहा कि मैथिली को भाषा विकल्प के रूप में शामिल किए जाने से छात्रों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने और बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन का अवसर मिलेगा.
अभिभावक डा. राजेश कुमार ने कहा कि इस निर्णय से बच्चों में अपनी संस्कृति और भाषा के प्रति सम्मान बढ़ेगा तथा भाषा संरक्षण को मजबूती मिलेगी.
रोजगार और शिक्षा के खुलेंगे नए रास्ते
छात्रों में भी इस फैसले को लेकर उत्साह देखा जा रहा है. छात्रा प्रिया ने कहा कि अब वे अपनी क्षेत्रीय भाषा को औपचारिक रूप से स्कूल में पढ़ सकेंगे, जिससे रोजगार और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों में भी नए अवसर मिलेंगे.
उन्होंने कहा कि सीबीएसई का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसमें मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है.
शिक्षाविदों का मानना है कि यह निर्णय मैथिली भाषा के विकास में मील का पत्थर साबित होगा और मिथिला की अस्मिता को नई उड़ान देगा.
