Mushroom Training RPCAU Pusa: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा के अनुसंधान निदेशालय सभागार में मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर आयोजित 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन बुधवार को प्रमाणपत्र वितरण के साथ हुआ.
बिहार मशरूम उत्पादन में बना अग्रणी
समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. रत्नेश कुमार झा ने कहा कि बिहार में मशरूम उत्पादन की शुरुआत लगभग शून्य स्तर से हुई थी, लेकिन आज राज्य इस क्षेत्र में देश में अग्रणी बन चुका है. उन्होंने कहा कि इसमें केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
उन्होंने बताया कि मशरूम आज दाल के बेहतर विकल्प के रूप में अपनी पहचान बना चुका है और देशभर में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
60 से अधिक मशरूम उत्पाद किए गए विकसित
डॉ. झा ने बताया कि विश्वविद्यालय के एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च के माध्यम से मशरूम से बने 60 से अधिक उत्पाद विकसित किए गए हैं. इनकी बेहतर ब्रांडिंग, लेबलिंग और पैकेजिंग कर राज्य के विभिन्न बाजारों में उपलब्ध कराया जा रहा है.
मशरूम उत्पादन तकनीक के प्रसार पर दिया जोर
स्वागत भाषण में एडीआर डॉ. एसके ठाकुर ने कहा कि वैज्ञानिकों और प्रतिभागियों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान ही प्रशिक्षण का उद्देश्य है. उन्होंने कहा कि आज मशरूम की मांग उत्पादन से अधिक है, इसलिए इसकी आधुनिक तकनीक को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है.
वैज्ञानिक सह एडीआर डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि प्रशिक्षुओं को मशरूम की विभिन्न प्रजातियों के उत्पादन की तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान होना जरूरी है. साथ ही उपभोक्ताओं की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित करने पर भी जोर दिया.
राष्ट्रीय स्तर के मॉड्यूल पर दिया गया प्रशिक्षण
सेवानिवृत्त वैज्ञानिक एवं मशरूम विशेषज्ञ डॉ. दयाराम ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने में प्रशिक्षुओं की अहम भूमिका होगी. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर तैयार मॉड्यूल के आधार पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
कार्यक्रम का संचालन केंद्र प्रभारी डॉ. आरपी. प्रसाद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ. आरपीके राय ने किया.
