हड़ताल अवधि का नहीं मिलेगा वेतन

नो वर्क नो पे. प्रधान सचिव ने डीइओ व डीपीओ स्थापना को पत्र भेज जारी किया निर्देश समस्तीपुर : नियोजित प्रारंभिक शिक्षकों को नो वर्क नो पे के सिद्घांत के आधार पर वेतन नहीं मिलेगा़ शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने डीइओ व डीपीओ स्थापना को पत्र भेजते हुए आवश्यक निर्देश जारी किया […]

नो वर्क नो पे. प्रधान सचिव ने डीइओ व डीपीओ स्थापना को पत्र भेज जारी किया निर्देश
समस्तीपुर : नियोजित प्रारंभिक शिक्षकों को नो वर्क नो पे के सिद्घांत के आधार पर वेतन नहीं मिलेगा़ शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने डीइओ व डीपीओ स्थापना को पत्र भेजते हुए आवश्यक निर्देश जारी किया है़ पत्र के आलोक में डीपीओ स्थापना रामचंद्र मंडल ने सभी बीइओ को पत्र जारी कर दिया है़
प्रधान सचिव ने कहा कि हड़ताल पर रहने वाले नियोजित शिक्षकों को नो वर्क नो पे का सिद्धांत लागू होगा़ हड़ताल अवधि का नियत वेतन नहीं मिलेगा़ उन्होंने अप्रैल माह के वेतन को लेकर कई आवश्यक निर्देश दिये हैं. इसके तहत वेतन भुगतान संबंधी एडवाइस भेजने से पूर्व सभी नियोजन इकाई से कार्य करने वाले शिक्षकों की सूची प्राप्त कर लें. उन्होंने कहा कि कार्य पर रहने से संबंधित प्रमाण पत्र के आधार पर वेतन भुगतान का एडवाइस निर्गत किया जाए़ इसके अलावा जो शिक्षक हड़ताल पर हैं, उनकी सूची अलग से प्राप्त कर लें
वहीं, जो शिक्षक हड़ताल पर हैं और जो शिक्षक हड़ताल पर नहीं है़ ऐसी स्थिति में दोनों मामले से संबंधित प्रतिवेदन प्रारंभिक शिक्षकों के मामले में प्राथमिक शिक्षा के निदेशक व माध्यमिक शिक्षकों के मामले में माध्यमिक शिक्षा के निदेशक को अविलंब उपलब्ध कराया जाए़ उन्होंने सभी बिंदुओं का अनुपालन सख्ती से करने का निर्देश दिया है़ प्रधान सचिव ने निर्धारित समय तक सभी आवश्यक प्रतिवेदन संबंधित निदेशालय को उपलब्ध करा द़ें
इसके बाद विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा की जायेगी़ डीपीओ स्थापना ने सभी बीइओ को पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर आवश्यक प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है़
मोरवा : शिक्षकों के बेमियादी हड़ताल से सभी विद्यालयों में ताला लटका है. सामने गरमी की छुट्टी है. लगभग एक माह से विद्यालयों पठन पाठन प्रभावित है. बच्चे और अभिभावक दोनों परेशान हैं.
एक ओर जहां निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे सजधज कर विद्यालय जाकर अपना भविष्य संवार रहे हैं वहीं सरकारी विद्यालय के बच्चे अपने भाग्य को कोस रहे हैं. उन्हें पढ़ाई के साथ साथ स्वादिष्ट व्यंजनों से वंचित होना पड़ रहा है. बच्चों के पढ़ाई की भरपाई कैसे हो पाएगी यह सोचकर अभिभावक परेशान हो रहे हैं. विद्यालय खुलने के आसार अभी कम ही नजर आ रहा है.
बच्चों को नये वर्ग का किताब भी नहीं मिला ऐसे में उसका कोर्स कैसे पूरा हो पाएगा. बच्चों एवं उनके अभिभावकों का कहना है कि आखिर किस गुनाह की सजा बच्चों को मिल रही है. वेतनमान मिलने पर दिवाली तो शिक्षकों के घर मनेगी और सरकार को वाहवाही मिलेगी लेकिन उन बच्चों को क्या मिलेगा जिसके वे वास्तविक हकदार हैं.इधर शिक्षकों की बेमियादी हड़ताल जारी है. असंतुष्ट शिक्षक अपना आगे की रणनीति बना अपने मांग पर कायम हैं.

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