विगत एक माह में हुआ है 25 से 30 फीसदी का इजाफामोरवा. क्षेत्र के मध्य एवं निम्न वर्गीय परिवार के लोगांे की थाली से दाल अब दूर होने लगी है. विगत एक माह में इसके कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत का इजाफा हो जाने से लोग इसे खरीदने में असमर्थ दिख रहे है. सभी वर्ग के लोगांे के लिए दाल एक प्रमुख विटामिन का स्रोत है. लेकिन कीमत में अचानक उछाल आने से लोग इससे वंचित होने लगे हंै. कल तक 40 रुाये बिकने वाला चना दाल आज 60 रुपये व 60 रुपये किलो बिकने बाला मसूर 80 से 82 रुपये किलो बिक रहा है. अरहर व मूंग तो सैकड़ों पार कर सौ से एक सौै बीस पर चला गया है. लोग पहले किलो में खरीदते थे अब पाव में खरीदने को मजबूर हंै. कुछ इसी तरह की परेशानी आंगनबाड़ी सेविकाओं की बढ़ चली है. इन केंद्रों को मसूर दाल खरीदने के लिए मात्र 52 रुपये प्रति किलो का रेट दिया जाता है जबकि यह मार्केट में अस्सी से बेरासी रुपये किलो मिल रहा है. ऐसे में परेशानी है कि मेनू के हिसाब से कैसे बच्चों को पोषाहार दिया जाय. कारोबारियों की मानें तो दलहन की कीमत में और इजाफा हो सकता है. अभी जबकि सभी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बंद है तब यह दशा है विद्यालय खुलने के बाद मांग बढ़ना तो लाजिमी है. पिछले साल भीषण गर्मी से मूंग की फसल मारी गयी थी तब से किसानांे की थाली से दाल गायब होने लगा है.
दूर होने लगी है थाली से दाल की कटोरी
विगत एक माह में हुआ है 25 से 30 फीसदी का इजाफामोरवा. क्षेत्र के मध्य एवं निम्न वर्गीय परिवार के लोगांे की थाली से दाल अब दूर होने लगी है. विगत एक माह में इसके कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत का इजाफा हो जाने से लोग इसे खरीदने में असमर्थ दिख रहे है. सभी […]
