हर कोई कहता वतन से प्यार है...

प्रतिनिधि, शाहपुर पटोरी खून देकर चमन को सजा दीजिए, जान वो तन इस वतन पे लूटा दीजिए…जैसी रचनाएं सुना कर भगवान सिंह भास्कर व शरदेंदु ने बुधवार को चतुर्थ रामदुलारी पुण्य स्मृति पर्व के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में चार चांद लगा दिया. इस कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में […]

प्रतिनिधि, शाहपुर पटोरी खून देकर चमन को सजा दीजिए, जान वो तन इस वतन पे लूटा दीजिए…जैसी रचनाएं सुना कर भगवान सिंह भास्कर व शरदेंदु ने बुधवार को चतुर्थ रामदुलारी पुण्य स्मृति पर्व के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में चार चांद लगा दिया. इस कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में साहित्य संग्रह ‘स्मृति शिखा’ का लोकार्पण किया गया. सिरदिलपुर उसराहा के वंदना परिसर में आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम का उद्घाटन वरीय साहित्यकार रामलखन राय ने दीप जला कर किया. राष्ट्रीय गीतकार राजमणि राय मणि की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में संचालन ई़ अवधेश सिंह ने किया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सोनपुर के सीताराम सिंह, एमआईटी मुजफ्फरपुर के प्राचार्य डा़ नीलरत्न बरनवाल, पटना के मो नाशाद औरंगाबादी व बेंगलुरु के एम बलरामन मौजूद थे. पटना से गजलकार मो अशर फरीदी द्वारा प्रस्तुत ‘चावलों के सभी दाने’ व नाशाद औरंगाबादी द्वारा प्रस्तुत ‘जिस जगह रहिये, वहां मिलते मिलाते रहिये’ ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया. डॉ शैलेन्द्र शर्मा त्यागी ने ‘हर कोई कहता वतन से प्यार है, लूटने को सब यहां तैयार है’ सुनाकर वर्तमान देशभक्तों पर कुठाराघात किया. ज्ञानशंकर शर्मा द्वारा प्रस्तुत ‘बदलते वक्त से पैगामेे मोहब्बत सीखो’ तथा रामलखन राय द्वारा प्रस्तुत ‘खारा सागर जल होता है’ भी सराही गई. मौके पर बैद्यनाथ प्रसाद साह, फिरोज आलम, डॉ अशरफ इमाम, रवींद्र ठाकुर, चांद मुसाफिर, सीताराम शेरपुरी, डॉ बिंदेश्वर दास, दुखित महतो, रामजी साह, शिवेंद्र कुमार पाण्डेय आदि ने भी अपनी रचनायें सुनायी.

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