आस्था. श्रद्धापूर्वक की गयी पूजा, तैयार हुआ लेखा-जोखा
समस्तीपुर : कायस्थों के इष्ट देवता भगवान चित्रगुप्त की पूजा शनिवार को धूमधाम से की गयी. कलम दवात के साथ कायस्थों ने अपने घरों में पूजा अर्चना की. मषीभाजन संयुक्श्चरसि त्वं महीतले के मंत्रों से उन्हें गुड़ व अदरक का बना विशेष नैवेध भोग लगया गया. शहर के धर्मपुर, काशीपुर, मोहनपुर, धुरलख आदि जगहों पर चित्रगुप्त मंदिरों में भगवान की प्रतिमा स्थापित कर उनकी विधिवत् पूजा अर्चना की गयी. मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रम्हा के शरीर से कायस्थ की उत्पत्ति हुयी थी. जिन्हें ब्रम्हा के वरदान के बाद धर्माधर्म के निर्धारण के लिये यमपुरी में नियुक्त किया गया. इस दिन घरों में वार्षिक लेखा जोखा रखने की परंपरा है.
वहीं कई जगहों पर चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है. वाद विवाद, निबंध प्रतियोगिता, परिवार मिलन समारोह का आयोजन हो रहा है. सरायरंजन : संपूर्ण संसार के सभी प्राणियों के जीवन रुपी दस्तावेज के रचनाकर हैं भगवान चित्रगुप्त.उक्त बातंे शनिवार को नरघोघी गांव में भगवान चित्रगुप्त पूजन समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कही. प्राणियों के किये गऐ कमार्े के अनुसार फलस्वरुप स्वर्ग और नरक का निर्धारण करते हैं.
इस अवसर पर भगवान चित्रगुप्त के चित्र पर माल्यार्पण किया गया. मौके पर अजय कुमार, राजीव कुमार श्रीवास्तव, आर्यण राज, अर्णव राज, मृत्युंजय कुमार, संजय कुमार वर्मा, अभय कुमार, मिथिलेष कुमार सिन्हा, अरुण कुमार, गोपाल वर्मा, मनोज सिन्हा, मनोज श्रीवास्तव आदि लोग शामिल हुए. दलसिंहसराय: अनुमंडल क्षेत्र में शनिवार को चित्रांशों ने अपने आराध्यदेव व पितामह भगवान चित्रगुप्त की श्रद्धापूर्वक भक्तिभाव से पूजा अर्चना की़ सार्वजनिक पूजा भगवानपुर चकसेखू स्थित काली मंदिर परिसर में भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा स्थापित कर की़ समुदाय के लोगों में रमेशचंद्र प्रसाद, अरूण प्रसाद, सज्जन कुमार, योगेश कुमार, सौरभ कुमार, श्यामकृष्ण प्रसाद, कृष्णमुरारी प्रसाद आदि थे.भगवान चित्रगुप्त से अपने व परिवार के सुख, समृद्धि व मंगलमय जीवन की कामना की़