सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर आयी तकनीकी खराबी ने बढ़ा दी यात्रियों की मुश्किलें
50 मिनट तक टिकट सेवा रही बाधित
सिमरी बख्तियारपुर. पूर्व मध्य रेलवे अंतर्गत सहरसा-मानसी रेलखंड पर स्थित सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर बुधवार की सुबह अचानक आयी तकनीकी खराबी ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी. सुबह करीब 6 बजकर 15 मिनट से स्टेशन के टिकट काउंटर पर इलेक्ट्रिक फेल होने के कारण टिकट निर्गत करने की प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो गयी, जिससे सुबह की ट्रेनों से सफर करने पहुंचे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. रेल सूत्रों के अनुसार लगभग 50 मिनट तक टिकट सेवा बाधित रही. राज्यरानी ट्रेन के यात्री इससे प्रभावित हुए. सुबह के समय बड़ी संख्या में यात्री स्टेशन पर पहुंचे थे, लेकिन टिकट सेवा ठप रहने के कारण काउंटर पर लंबी कतारें लग गयी. काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद टिकट नहीं मिलने से यात्रियों में नाराजगी और आक्रोश देखा गया. कई यात्री समय से पहले लाइन में लगने के बावजूद टिकट नहीं मिलने से मायूस होकर लौटते नजर आये, जबकि कुछ यात्री मजबूरी में बिना टिकट ही यात्रा करने को विवश हो गये. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे कर्मियों द्वारा टिकट काउंटर पर अस्थायी रूप से सेवा बंद रहने का नोटिस भी चस्पा कर दिया गया था. घटना की सूचना तत्काल समस्तीपुर रेल मंडल को दी गयी, जिसके बाद तकनीकी टीम को मौके पर भेजा गया. टेक्नीशियन द्वारा जांच के बाद पता चला कि कंप्यूटर सिस्टम के यूपीएस में आयी खराबी के कारण पूरी समस्या उत्पन्न हुई थी. तकनीकी टीम की तत्परता से कुछ ही देर में खराबी को दूर कर लिया गया, जिसके बाद टिकट वितरण की प्रक्रिया फिर से सामान्य रूप से शुरू कर दी गयी. हालांकि इस दौरान यात्रियों को हुई असुविधा ने रेलवे व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए.
राज्यरानी के यात्री हुए परेशान
तकनीकी खराबी के दौरान राज्यरानी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा. टिकट नहीं मिलने के कारण कई यात्रियों को बिना टिकट ही यात्रा करनी पड़ी, जिससे वे पूरे सफर के दौरान असहज बने रहे. इस संबंध में स्टेशन मास्टर अजय कुमार सिंह ने बताया कि यूपीएस में आयी तकनीकी खराबी के कारण कुछ समय के लिए टिकट सेवा बाधित हुई थी, जिसे तकनीकी टीम द्वारा शीघ्र ही ठीक कर लिया गया. अब सभी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं.
