सहरसा . यूजीसी के नयी गाइडलाइन को लेकर चल रहे बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी के सोशल मीडिया आईटी सेल प्रदेश सह संयोजक डॉ अभिषेक वर्धन ने कहा कि यह यूजीसी द्वारा संस्थानों में चले आ रहे भेदभाव को रोकने में अहम साबित होगा. संस्थागत भेदभाव के वजह से अवसरों की समानता से समाज के वंचित वर्ग प्रभावित हो रहे थे. इस वजह से कई सारे संस्थानों में कई प्रकार की भेदभाव देखने को मिलती थी. इसमें नस्लों के आधार पर जातीय आधार पर, जन्म के आधार पर, दिव्यंगता के आधार पर स्थान के आधार पर किये जाने वाले भेदभाव पर लगाम लगेगी. उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा यूजीसी एक्ट 2026 के खिलाफ भ्रम फैलाकर समाज में वैमनस्यता फैलाने का काम प्रारंभ किया जा चुका है. जब किसी संस्थान में किसी छात्र-छात्रा को इस प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ता है व वह इस भेदभाव से आत्महत्या तक कर लेते हैं तब विपक्ष पूरी तरह से चुप्पी साध लेता है. लेकिन जैसे ही मोदी सरकार ऐसे कानून को लाती है जिससे संस्थागत भेदभाव पर अंकुश लग सके तो विपक्ष समाज को लड़वाने के लिए नया-नया हथकंडा अपनाता है. सरकार द्वारा बनाया गया यूजीसी एक्ट 2026 आने वाले समय में मिल का पत्थर साबित होगा एवं संस्थागत भेदभाव के उन्मूलन में अहम साबित होगा.
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