बिना बोर्ड लगाये उत्क्रमित उच्च विद्यालय परताहा में हो रहा चाहरदीवारी निर्माण

बिना बोर्ड लगाये उत्क्रमित उच्च विद्यालय परताहा में हो रहा चाहरदीवारी निर्माण

संवेदक ने कहा, नहीं लगा है योजना का बोर्ड, दिया गया है बनने विभागीय एसडीओ ने कहा, बोर्ड लगाया गया था, किसी ने उखाड़ लिया विद्यालय प्राचार्य ने कहा, बिना योजना बोर्ड लगाये ही हो रहा काम नवहट्टा. प्रखंड क्षेत्र के उत्क्रमित उच्च विद्यालय परताहा बरहरा के परिसर में पिछले एक सप्ताह से चाहरदीवारी का निर्माण कराया जा रहा है. निर्माण कार्य में घटिया किस्म की ईंट और कम गुणवत्ता वाले सीमेंट के उपयोग का आरोप लगाया जा रहा है. सबसे गंभीर बात यह है कि निर्माण कार्य से संबंधित किसी भी प्रकार की योजना बोर्ड स्थल पर नहीं लगाया गया है. जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि किस संवेदक द्वारा, किस मद से और कितनी राशि की लागत से चाहरदीवारी का निर्माण कराया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि चाहरदीवारी निर्माण को लेकर न तो विद्यालय के प्रधानाध्यापक से किसी प्रकार की अनुमति ली गयी है और न ही उन्हें इसकी कोई आधिकारिक जानकारी दी गयी है. मिली जानकारी के अनुसार संवेदक के पुत्र सत्यम कुमार की देखरेख में चाहरदीवारी का निर्माण कार्य कराया जा रहा है. इस संबंध में पूछे जाने पर संवेदक पुत्र सत्यम कुमार ने बताया कि योजना बोर्ड अभी बनकर नहीं आया है. वहीं संवेदक टुनटुन यादव ने बताया कि योजना बोर्ड बनने दिया गया है. बोर्ड बनकर नहीं आया है. बनकर आयेगा तो लगा दिया जायेगा. 11 लाख 94 हजार की राशि से चाहरदीवारी का निर्माण किया जा रहा है. वहीं जब इस मामले में संबंधित जेई विवेक कुमार से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया और कहा कि वे छुट्टी पर थे. लेकिन उनकी छुट्टी पर रहने के बावजूद सरकारी स्टीमेट की अनदेखी कर संवेदक द्वारा मनमाने ढंग से चाहरदीवारी निर्माण किया जा रहा है. स्थानीय विश्वनाथ साह व विद्यालय के एचएम सहित अन्य शिक्षकों ने बताया कि दो नंबर व तीन नंबर ईंट चाहरदीवारी निर्माण के लिए लाया गया. जब कार्य का स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किया गया तो ईंट बदल दिया गया. इधर विभागीय एसडीओ प्रेम शंकर कुमार का एक अजूबा बयान सामने आया. उनसे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि योजना बोर्ड किसी ने उखाड़ लिया है. योजना बोर्ड लगाया गया था. पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है और उन्होंने निर्माण कार्य की जांच कराये जाने की मांग की है. हालांकि विद्यालय प्राचार्य सहित अन्य शिक्षकों ने बताया कि यहां किसी तरह का बोर्ड लगाया ही नहीं गया है. एसडीओ द्वारा बोर्ड लगने की पुष्टि वाली बात एकदम मिथ्या है.

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By Dipankar Shriwastaw

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