त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय की बढ़ोत्तरी की सदन में रखी मांग सहरसा . विधान परिषद सदस्य डाॅ अजय कुमार सिंह ने सदन में चर्चा करते हुए कहा कि बिहार की सरकार पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार में लगातार कटौती कर रही है. वार्ड सदस्य को विकास कार्य से वंचित रखा गया है. पूर्व में जल-नल योजना के तहत वार्ड के जल-नल के देखरेख की जिम्मेदारी एक निश्चित मानदेय पर वार्ड सदस्य को दी गयी थी. उससे भी उन्हें वंचित कर दिया गया. पंचायत सचिव, जिला परिषद सदस्य एवं नगर निगम व परिषद के वार्ड कमिश्नर का मानदेय कभी नहीं बढ़ा. विधान पार्षद ने सदन में कुमार कलानंद मणि द्वारा लिखित पुस्तक पंचायती राज एवं ग्राम सरकार को सदन में दिखाते कहा कि इस पुस्तक में महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, विनोवा भावे, रजनी कोठारी के ग्राम पंचायत पर विचार को शामिल किया गया है. जब तक ग्राम पंचायत व स्थानीय निकाय की संस्थाएं मजबूत नहीं होंगी, राज्य का विकास संभव नहीं है. डाॅ सिंह ने कहा कि सरकार को इस किताब के विचार पर अमल कर ग्राम स्वराज की संकल्पना को मजबूत करना चाहिए. उन्होंने मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच, पंच, समिति सदस्य, जिप व वार्ड कमिश्नर के मानदेय में सम्मान जनक बढोतरी की मांग सदन में की.
पंचायत प्रतिनिधि को है निम्न मानदेयः एमएलसी
पंचायत प्रतिनिधि को है निम्न मानदेयः एमएलसी
