सहरसा . सामाजिक समरसता एवं बंधुत्व के लिए खतरा माने जा रहे नये यूजीसी संशोधनों के खिलाफ देशभर में उठे विरोध के बाद सरकार को बड़ा झटका लगा है. सर्वोच्च न्यायालय ने इन संशोधनों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते सरकार को नये सिरे से मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है. इस निर्णय के समर्थन में जिले में अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा के बैनर तले चल रहे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मोर्चा के प्रदेश महामंत्री व अधिवक्ता ज्योति कुमार सिंह ने कहा कि यह जीत केवल सवर्ण समाज की नहीं है. बल्कि सभी सामाजिक वर्गों की साझा जीत है. उन्होंने कहा कि यूजीसी के नये प्रावधान शिक्षण संस्थानों में विभाजन की नीति को बढ़ावा देने वाले थे. जिसे जनता ने एकजुट होकर नकार दिया. उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सरकार की विभेदकारी सोच पर करारा प्रहार है. लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से सड़क से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है. निष्पक्ष न्यायपालिका के रहते देश में किसी भी प्रकार का भेदभाव टिक नहीं सकता. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गुरुवार को मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को अबीर लगाकर खुशी जाहिर की. साथ ही अबीर मिठाई खिलाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की. इस दौरान यह संदेश भी दिया कि आंदोलन किसी वर्ग या समुदाय के विरोध में नहीं था. बल्कि अपने अधिकारों व सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए था. मौके पर प्रशांत ठाकुर, अभिजीत आनंद, कुणाल आनंद, राजू सिंह, अजय कुमार वर्मा राकेश कुमार बंटी, ललित कुमार झा, जीवन कुमार वर्मा, समीर कुमार संगम, सुनील कुमार झा, आनंद सिंह, आशुतोष कुमार झा, पप्पू कुमार ठाकुर, प्रशांत कुमार राजू, ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष अमित कुमार मिश्रा उर्फ डब्बू मिश्रा, अजय वर्मा, सोना सिंह भदौरिया, अर्पित सिन्हा, राजा चौहान, हरेंद्र सिंह मेजर, प्रशांत कुमार सिंह, विप्लव रंजन, सुनील झा, विकास चौहान, गुंजेश कुमार सिंह, बुल्लू झा, विपुल सिंह, प्राण आनंद, ललित कुमार झा, जीवन कुमार वर्मा, मनोरंजन सिंह सहित अन्य मौजूद थे.
यूजीसी के नये प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, आंदोलनकारियों ने जताई खुशी
यूजीसी के नये प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
