सहरसा के पतरघट प्रखंड कार्यालय में पेयजल और शौचालय व्यवस्था ध्वस्त, गर्मी में कर्मचारी और आम लोग परेशान

Saharsa News: सहरसा के पतरघट प्रखंड सह अंचल कार्यालय में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ठप है. सार्वजनिक शौचालय भी बदहाल है. कर्मचारी और आम लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं.

सहरसा के पतरघट से राजेश कुमार सिंह

Saharsa News: सरकारी दफ्तरों में आम लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन सहरसा के पतरघट प्रखंड सह अंचल कार्यालय की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. भीषण गर्मी के बीच यहां पेयजल के सभी प्रमुख स्रोत लंबे समय से खराब पड़े हैं. इतना ही नहीं, कर्मचारियों और आम लोगों के लिए बने सार्वजनिक शौचालय की हालत भी बेहद खराब है. नतीजा यह है कि रोज सैकड़ों लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हो रहे हैं.

भीषण गर्मी में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ठप

पतरघट प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में पेयजल व्यवस्था लंबे समय से ठप पड़ी है. कार्यालय परिसर में लगे चापाकल और अन्य पेयजल स्रोत खराब हैं, जिससे कर्मचारी, अधिकारी और प्रतिदिन आने वाले सैकड़ों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी और उमस के बीच पानी की व्यवस्था नहीं होने से लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं.

पतरघट प्रखंड कार्यालय

रोज सैकड़ों लोग पहुंचते हैं सरकारी काम से

पतरघट प्रखंड कार्यालय में हर दिन बड़ी संख्या में लोग सामाजिक सुरक्षा पेंशन, जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज, भूमि संबंधी कार्य, मनरेगा, राशन कार्ड और प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई सरकारी योजनाओं से जुड़े काम के लिए पहुंचते हैं.

लेकिन परिसर में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें घंटों प्यासे रहना पड़ता है या बाहर जाकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है.

कर्मचारियों को खरीदना पड़ रहा बोतलबंद पानी

कार्यालय के कई कर्मचारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पूरे दिन कार्यालय में काम करना पड़ता है, लेकिन पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है.

मजबूरी में उन्हें बाहर की दुकानों से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है या आसपास के निजी प्रतिष्ठानों में जाकर पानी पीना पड़ता है. इससे कर्मचारियों के साथ-साथ कार्यालय आने वाले आम नागरिकों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है.

Saharsa News: शौचालय की हालत भी चिंताजनक

समस्या सिर्फ पेयजल तक सीमित नहीं है. कार्यालय परिसर में कर्मचारियों और आम लोगों के लिए बने सार्वजनिक शौचालय की स्थिति भी बेहद खराब बताई जा रही है.

कर्मचारियों का कहना है कि शौचालय उपयोग लायक नहीं रह गया है. कई बार लोगों को मजबूरी में बाहर जाना पड़ता है. वहीं बड़े अधिकारियों के कक्षों में अटैच शौचालय उपलब्ध होने की बात भी सामने आई है.

इस स्थिति ने स्वच्छ भारत अभियान और सरकारी कार्यालयों में नागरिक सुविधाओं के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

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प्रशासनिक उदासीनता पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रखंड और अंचल कार्यालय ऐसा स्थान है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं.

ऐसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय में पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है. लोगों का कहना है कि यदि सरकार नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने का दावा करती है, तो इसकी शुरुआत सरकारी कार्यालयों से होनी चाहिए.

अधिकारियों से नहीं मिला स्पष्ट जवाब

जब इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका. हालांकि सूत्रों का कहना है कि विभाग को इस समस्या की जानकारी पहले से है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है.

स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे जिला प्रशासन से शिकायत करेंगे और बुनियादी सुविधाएं बहाल कराने की मांग करेंगे.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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