सहरसा से आशीष कुमार सिंह की रिपोर्ट
Saharsa News: सहरसा जिले के बनमा ईटहरी प्रखंड में हर घर नल-जल योजना की हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है. विभिन्न पंचायतों में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई जलापूर्ति व्यवस्था बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी है. कई जगहों पर पानी टंकी जर्जर हो चुकी हैं, जबकि पाइपलाइन और टोटियां क्षतिग्रस्त होने से लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है. नतीजतन ग्रामीण फिर से चापाकलों और आयरनयुक्त पानी पर निर्भर हो गए हैं.
दो साल बाद भी नहीं मिला नियमित पानी
बनमा-सुगमा मार्ग स्थित हथ मंडल के समीप निर्मित जलमीनार इस योजना की बदहाली की कहानी बयां कर रही है. जलमीनार परिसर झाड़ियों से घिर चुका है और रखरखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था उपेक्षित पड़ी है. ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार का निर्माण हुए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक नियमित रूप से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है.
टूटी टोटियां और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन बनी परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार कई घरों में लगी टोटियां टूट चुकी हैं और पाइपलाइन भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है. ऐसे में नल-जल योजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है. लोगों का कहना है कि योजना के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद खराब है.
आयरनयुक्त पानी से बढ़ रही स्वास्थ्य चिंता
नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरन चापाकल और अन्य स्थानीय स्रोतों से पानी लेना पड़ रहा है. इनमें अधिकांश स्थानों पर आयरनयुक्त पानी निकलता है, जो स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
प्रशासन से जांच और मरम्मत की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से नल-जल योजना की जांच कराने, क्षतिग्रस्त पाइपलाइन और टोटियों की मरम्मत करवाने तथा नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि योजना का उद्देश्य लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान में यह उद्देश्य अधूरा नजर आ रहा है.
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी गुलशन कुमार झा ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है और पीएचईडी विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा जा रहा है.
