क्या बदल जाएगा सहरसा जंक्शन का नाम? पंडित मंडन मिश्र के नाम पर उठी बड़ी मांग

Saharsa Junction News: मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. अब सहरसा जंक्शन का नाम महान दार्शनिक पंडित मंडन मिश्र के नाम पर रखने की मांग उठी है. सोशल एक्टिविस्ट दिलीप कुमार चौधरी ने जनप्रतिनिधियों से इस दिशा में पहल करने की अपील की है.

सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट

Saharsa Junction News: मिथिला की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग के बीच अब सहरसा जंक्शन का नाम बदलकर “पंडित मंडन मिश्र जंक्शन, सहरसा” करने की मांग उठी है. शिक्षाविद और सोशल एक्टिविस्ट दिलीप कुमार चौधरी ने कहा है कि यह केवल एक नाम परिवर्तन का मामला नहीं, बल्कि मिथिला की बौद्धिक धरोहर को सम्मान देने का प्रयास है.

दिलीप कुमार चौधरी ने कहा कि पंडित मंडन मिश्र भारतीय दर्शन के उन महान विद्वानों में शामिल रहे हैं, जिनकी ख्याति देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में रही है. ऐसे में उनके नाम पर सहरसा जंक्शन का नामकरण किया जाना मिथिला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगा.

मिथिला की गौरवशाली परंपरा को मिले राष्ट्रीय पहचान

उन्होंने कहा कि मिथिला सदियों से ज्ञान, दर्शन और शास्त्रार्थ की भूमि रही है. पंडित मंडन मिश्र इस परंपरा के सबसे महत्वपूर्ण प्रतिनिधियों में से एक हैं. उनके दार्शनिक योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए जरूरी है कि सरकार इस दिशा में सकारात्मक पहल करे.

सोशल एक्टिविस्ट ने कहा कि सहरसा जंक्शन उत्तर बिहार का एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है. यदि इसका नाम पंडित मंडन मिश्र के नाम पर रखा जाता है, तो इससे देशभर के लोगों को मिथिला की समृद्ध बौद्धिक विरासत के बारे में जानने का अवसर मिलेगा.

Saharsa Junction News: जनप्रतिनिधियों से संसद और सरकार में मुद्दा उठाने की अपील

दिलीप कुमार चौधरी ने मिथिला क्षेत्र के सांसदों, विधायकों और मंत्रियों से इस मुद्दे को संसद और सरकार के समक्ष मजबूती से उठाने की अपील की. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर इस दिशा में पहल करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सड़क और रेल संपर्क के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है. ऐसे में सरकार को क्षेत्र की महान विभूतियों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए. उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से इस मांग पर सकारात्मक विचार करने की अपेक्षा जताई.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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