सहरसा स्वास्थ्य समिति में डीपीएम प्रभार विवाद गहराया, राज्य कर्मचारी महासंघ भी उतरा मैदान में

सहरसा स्वास्थ्य समिति में जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) के अतिरिक्त प्रभार को लेकर विवाद गहरा गया है. 35 स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने एचआर पॉलिसी के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जबकि राज्य कर्मचारी महासंघ ने भी मामले में हस्तक्षेप किया है.

Saharsa News: सहरसा जिला स्वास्थ्य समिति में जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) के अतिरिक्त प्रभार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राज्य स्तर तक पहुंच गया है. पहले 35 स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने एचआर पॉलिसी के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए जिला पदाधिकारी को सामूहिक आवेदन दिया था. अब अखिल भारतीय स्वास्थ्य एवं एनएचएम कर्मचारी महासंघ (बीएमएस) ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए डीएम सह जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है.

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब शिकायत करने वाले कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि आवेदन देने के बाद उनकी आवाज दबाने और बयान बदलवाने की कोशिश की जा रही है. इससे विवाद और गहरा गया है.

राज्य कर्मचारी महासंघ ने डीएम को लिखा पत्र

अखिल भारतीय स्वास्थ्य एवं एनएचएम कर्मचारी महासंघ (राज्य बिहार) के उपाध्यक्ष ललन कुमार सिंह ने 12 अगस्त 2026 को जिला पदाधिकारी को पत्र भेजकर कहा कि महासंघ को उसकी सहरसा इकाई की ओर से डीपीएम प्रभार विवाद की जानकारी मिली है.

पत्र में कहा गया है कि अस्पताल प्रबंधक को डीपीएम का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर कर्मचारियों और अधिकारियों ने आपत्ति दर्ज कराई है और मामले की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है. महासंघ ने यह भी कहा कि जिला कार्यक्रम प्रबंधक के स्थानांतरण के बाद प्रभार आवंटन में एचआर पॉलिसी के प्रावधानों और वरिष्ठता का पालन किया जाना चाहिए.

योग्य और वरीय अधिकारियों की अनदेखी का आरोप

विवाद का मुख्य आधार यह है कि जिला स्वास्थ्य समिति में कई अनुभवी और वरीय अधिकारी मौजूद होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधक को डीपीएम जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया.

विरोध करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि यह निर्णय एचआर पॉलिसी की भावना के अनुरूप नहीं है और इससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है. उनका तर्क है कि डीपीएम पद जिला स्वास्थ्य समिति की योजनाओं के संचालन, निगरानी, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के समन्वय से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण पद है. इसलिए इस पद पर प्रभार देने के लिए निर्धारित मानकों और वरिष्ठता का पालन आवश्यक है.

35 अधिकारियों-कर्मचारियों ने पहले ही जताई थी आपत्ति

इससे पहले जिला स्वास्थ्य समिति के 35 अधिकारियों और कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से जिला पदाधिकारी को ईमेल के माध्यम से आवेदन सौंपा था. आवेदन में अस्पताल प्रबंधक को डीपीएम का प्रभार दिए जाने पर सवाल उठाते हुए एचआर पॉलिसी के उल्लंघन, कार्य संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव, कर्मचारियों के मनोबल में गिरावट और स्वास्थ्य कार्यक्रमों की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई थी.

आवेदन में यह भी कहा गया था कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर प्रभार देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन होना चाहिए.

आवाज दबाने के प्रयास का आरोप

अब विवाद ने एक और गंभीर मोड़ ले लिया है. शिकायत करने वाले कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि आवेदन देने के बाद उन पर दबाव बनाकर अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है.

उनका कहना है कि हस्ताक्षर करने वाले कर्मचारियों से यह कहलवाने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्होंने आवेदन या शिकायत पत्र पर किसी के दबाव में हस्ताक्षर किए थे. संबंधित सदस्यों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से आवेदन पर हस्ताक्षर किए हैं, तो बाद में उस पर दबाव बनाकर बयान बदलवाने का प्रयास प्रशासनिक निष्पक्षता के खिलाफ है.

निष्पक्ष जांच की उठी मांग

शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति द्वारा किसी कर्मचारी पर दबाव, धमकी या अनुचित प्रभाव डालने का प्रयास किया गया है, तो उसकी भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है और किसी भी कर्मचारी को अपनी बात रखने या प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.

Saharsa News: डीएम के अगले कदम पर टिकी निगाहें

अब यह मामला कर्मचारियों की आंतरिक आपत्ति से आगे बढ़कर राज्यस्तरीय कर्मचारी संगठन के हस्तक्षेप तक पहुंच चुका है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और संगठन के प्रतिनिधियों की निगाहें अब जिला पदाधिकारी के अगले कदम पर टिकी हैं.

यदि मामले की जांच कराई जाती है, तो डीपीएम प्रभार आवंटन की प्रक्रिया, एचआर पॉलिसी के अनुपालन और कर्मचारियों द्वारा लगाए गए दबाव संबंधी आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है.

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लेखक के बारे में

By अंजन आर्यन सिंह

पत्रकारिता में 14 वर्षों का अनुभव. अब तक लगातार सहरसा से क्राइम और स्वास्थ्य की खबरें संकलित करता हूं.

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