मनरेगा पर ताला, मजदूरों के हक पर डाका

मनरेगा पर ताला, मजदूरों के हक पर डाका

लाखों की इमारत बनी मज़ाक, अफसर नदारद, मजदूर बेहाल सलखुआ . प्रखंड मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी वीबीजीरामजी कार्यालय में सोमवार को भी ताला झूल रहा है. जबकि सोमवार को साप्ताहिक बैठक की तिथि तय थी. गरीबों को रोजगार देने वाली जी राम जी सलखुआ प्रखंड में दम तोड़ती नजर आ रही है. लाखों रुपये की लागत से बना नरेगा कार्यालय आज खुद बेरोजगार पड़ा है. हाल यह है कि कार्यालय के दरवाजे पर अधिकांश समय ताला लटका रहता है और मजदूर अपने हक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं. जॉब कार्ड बनवाने, मजदूरी भुगतान की स्थिति जानने और काम की मांग दर्ज कराने जब मजदूर नरेगा कार्यालय पहुंचते है तो उन्हें अफसरों और कर्मियों की जगह सिर्फ बंद दरवाजे नसीब होते हैं. कई किलोमीटर दूर से आये मजदूर मायूस होकर लौट जाते हैं. यह स्थिति नरेगा जैसी राष्ट्रीय योजना पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. यह भी बताया जाता है कि अधिकारी व कर्मी अपने-अपने आवास पर ही कार्यालय चलाते है. जहां से ठीकेदार रूपी बिचौलिया व अधिकारी सहित कर्मियों का पौ बारह होता रहता है. स्थानीय ग्रामीण व जदयू नेता देवेंद्र कुमार ने साफ कहा कि सरकार रोजगार की गारंटी देती है, लेकिन यहां नरेगा कार्यालय बंद रखकर मजदूरों के हक पर सीधा कुठाराघात किया जा रहा है. भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष जैनेंद्र कुमार यादव ने आरोप लगाया कि कार्यालय बंद रहने से लोगों को योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पाती है. लोजपा (आर) प्रखंड अध्यक्ष अरुण यादव ने इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता करार देते हुए कहा कि जब मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना का यह हाल है, तो गरीब मजदूर आखिर जायें तो जायें कहां. चौंकाने वाली बात यह रही कि कार्यक्रम पदाधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन उनके मोबाइल नंबर 9006365988 पर लगातार रिंग होने के बावजूद फोन नहीं उठाया गया. इससे साफ है कि जिम्मेदार अधिकारी सवालों से बचने की कोशिश कर रहे हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि नरेगा कार्यालय को नियमित रूप से खोला जाये, कर्मियों की जवाबदेही तय हो और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाये. अन्यथा आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी लोग पीछे नहीं हटेंगे.

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By Dipankar Shriwastaw

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