सीएस ने कहा, विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा गया है पत्र
तीन फरवरी को सीएस ने स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव को कार्रवाई के लिए लिखा था पत्र
नवहट्टा. तीन फरवरी को नवहट्टा चिकित्सा प्रभारी के विरुद्ध सीएस द्वारा स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव को कार्रवाई के लिए पत्र भेजे जाने के 15 दिन बाद भी चिकित्सा पदाधिकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है. जिससे सहरसा स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगा है. तीन सदस्यीय टीम गठित किए जाने व जांच रिपोर्ट में दोषी करार साबित होने के बावजूद अगर कार्रवाई नहीं होती है, आरोपी चिकित्सा प्रभारी पदाधिकारी पद पर बने रहते हैं तो टीम गठित होना और आरोप सिद्ध होने का कोई मतलब नहीं रह जाता है. बीते 23 दिसंबर को नवहट्टा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज में लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया. चिकित्सकीय लापरवाही के कारण प्रसूता महिला की मौत हो गयी. हैरानी की बात यह है कि मामले की जांच में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को दोषी ठहराए जाने के बावजूद अब तक डॉक्टर के खिलाफ कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गयी है. डॉक्टर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर बने हुए हैं. सिर्फ सीएस द्वारा खानापूर्ति के लिए जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव को पत्र लिखा गया, लेकिन पद से नहीं हटाया गया.
इलाज में लापरवाही के कारण हुई थी जच्चा-बच्चा की मौत
मामला 23 दिसंबर का है. नवहट्टा प्रखंड के मुरादपुर निवासी ज्योति कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों द्वारा सुबह करीब चार बजे सीएचसी नवहट्टा में भर्ती कराया गया. उस समय अस्पताल में डॉ संजीव कुमार सिंह ड्यूटी पर थे. परिजनों ने आरोप लगाया कि ज्योति को अस्पताल में भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन सुबह से लेकर दोपहर तक उसका समुचित इलाज नहीं किया गया और न ही हालत गंभीर होने पर हायर सेंटर रेफर किया गया, जिसके कारण ज्योति कुमारी की स्थिति लगातार बिगड़ती रही. इसके कारण दोपहर में जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गयी.
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठने लगे सवाल
परिजनों की शिकायत पर जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया. जांच टीम द्वारा रिपोर्ट में कहा गया कि मृतका का इलाज डॉ संजीव कुमार सिंह द्वारा किया जा रहा था, लेकिन उनके द्वारा कोई प्रभावी एवं समय पर उचित इलाज नहीं किया गया. जांच टीम ने इसे चिकित्सकीय लापरवाही मानते हुए डॉक्टर संजीव कुमार सिंह को दोषी करार दिया. जांच रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन द्वारा संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया. बावजूद इसके अब तक न तो डॉक्टर को प्रभारी पद से हटाया गया है और न ही कोई कार्रवाई की गयी है. जब इस संबंध में सिविल सर्जन से सवाल किया गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि कार्रवाई के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है. स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की नियुक्ति एवं हटाने का अधिकार सिविल सर्जन द्वारा किया जाता है. ऐसे में जांच में दोषी पाए गये डॉक्टर को अब तक पद पर बनाए रखना कई सवाल खड़े करता है. पीड़ित परिवार को न्याय का इंतजार है एवं जिला प्रशासन की भूमिका पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई है.
