मत्स्यगंधा का रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर है शक्ति साधना का बड़ा केंद्र, नवरात्र में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़

सहरसा के मत्स्यगंधा में स्थित रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर भक्ति और शक्ति का संगम है. यहां चौसठ योगिनियों की प्रतिमाएं विशेष आकर्षण हैं. नवरात्र और काली पूजा में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.

सहरसा के मत्स्यगंधा स्थित रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को भक्ति और शक्ति साधना का विशेष वातावरण महसूस होता है. सुबह से लेकर देर शाम तक यहां भक्तों की आवाजाही बनी रहती है. मां रक्तकाली के दरबार में पहुंचकर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि, शांति तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. शक्ति उपासना की परंपरा और मंदिर परिसर में स्थापित चौसठ योगिनियों की प्रतिमाएं इसकी विशिष्ट पहचान मानी जाती हैं.

चौसठ योगिनियों की प्रतिमाएं हैं मंदिर की खास पहचान

रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर की सबसे खास विशेषताओं में यहां स्थापित चौसठ योगिनियों की प्रतिमाएं शामिल हैं. धार्मिक मान्यताओं के कारण इन प्रतिमाओं के दर्शन और पूजा के लिए दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्त मां रक्तकाली की पूजा के साथ चौसठ योगिनियों का दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव करने की कामना करते हैं.

स्थानीय लोगों के बीच मां रक्तकाली के प्रति गहरी आस्था है. मान्यता है कि मां की कृपा से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. इसी विश्वास के कारण सामान्य दिनों में भी मंदिर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी बनी रहती है.

शाम होते ही रोशनी में निखर उठता है मंदिर परिसर

हाल के वर्षों में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार पर भी काम किया गया है. शाम के समय मंदिर परिसर रोशनी से जगमगा उठता है. पूजा-पाठ और भक्तिमय माहौल के बीच मंदिर का वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है. शाम की आरती के दौरान भक्तों की मौजूदगी से परिसर का धार्मिक वातावरण और गहरा हो जाता है.

नवरात्र और काली पूजा में दिखता है भव्य नजारा

नवरात्र और काली पूजा के दौरान रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ काफी बढ़ जाती है. सुबह की आरती से शुरू होने वाला पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार का सिलसिला देर रात तक चलता है. विशेष अवसरों पर मां रक्तकाली का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न होती है.

शाम की महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. भक्त मंदिर परिसर में दीप प्रज्वलित कर मां से सुख-समृद्धि और शांति की कामना करते हैं. विशेष पूजा के दौरान पूरा परिसर घंटियों, मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों से गूंज उठता है.

धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन का भी आकर्षण

मत्स्यगंधा स्थित यह मंदिर धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ मंदिर की शक्ति उपासना की परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण को करीब से महसूस करते हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मां रक्तकाली के दरबार से कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता और सच्चे मन से मांगी गयी मनोकामना पूरी होती है. यही आस्था इस मंदिर को सहरसा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष पहचान देती है.

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By Vinay Kumar Mishra

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