कुशा अमावस्या पर विराटपुर में उमड़ी भीड़, विधि-विधान के साथ कुश उखाड़कर घर ले गये श्रद्धालु

कुशा अमावस्या के पावन अवसर पर विराटपुर के मां चंडी स्थान में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. लोग सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए विधि-विधान से कुश उखाड़कर घर ले गए. यह कुश पूरे साल धार्मिक कार्यों और पितरों के तर्पण में इस्तेमाल किया जाता है.

सोनवर्षाराज प्रखंड के विराटपुर स्थित मां चंडी स्थान के पास शुक्रवार को कुशा अमावस्या के मौके पर श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ जुटी. सुबह होते ही सोनवर्षाराज के अलावा आसपास के कई प्रखंडों से लोग यहां पहुंचने लगे. श्रद्धालुओं ने पूजा-पाठ के बाद विधि-विधान से कुश उखाड़ा और उसे अपने घर लेकर गये.

वर्षों से चली आ रही है कुश उखाड़ने की परंपरा

कुश ले जाते श्रद्धालु. | Prabhat Khabar Network

बताया जाता है कि मां चंडी स्थान परिसर से कुछ दूरी पर काफी बड़े इलाके में प्राकृतिक रूप से कुश उगता है. कुशा अमावस्या के दिन यहां से कुश उखाड़कर घर ले जाने की परंपरा काफी पुरानी है. इसी परंपरा को निभाने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग विराटपुर पहुंचते हैं.

पूरे साल धार्मिक काम में आता है कुश

लोगों का कहना है कि कुशा अमावस्या के दिन घर लाया गया कुश पूरे साल पूजा-पाठ और दूसरे धार्मिक काम में इस्तेमाल किया जाता है. खासकर श्राद्ध और पितरों के तर्पण में कुश का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है. इसी वजह से लोग इस दिन कुश लेने के लिए यहां पहुंचते हैं.

पूजा-पाठ और श्राद्ध में खास महत्व

सनातन परंपरा में कुश को पवित्र माना गया है. पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, श्राद्ध और पितृ तर्पण जैसे कामों में इसका इस्तेमाल होता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक कुशा अमावस्या पर श्रद्धा से कुश घर लाने की परंपरा को लोग आज भी पूरी आस्था के साथ निभा रहे हैं.

पितरों के तर्पण में भी होता है इस्तेमाल

धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या के दिन पूर्वज अपने परिवार की ओर से किये जाने वाले तर्पण की प्रतीक्षा करते हैं. तर्पण के दौरान कुश के जरिये पितरों को जल अर्पित किया जाता है. इसी कारण कुश को पितृ तर्पण की परंपरा में काफी महत्वपूर्ण माना गया है.

मां चंडी स्थान में भी की पूजा

कुश उखाड़ने के बाद श्रद्धालुओं ने मां चंडी स्थान पहुंचकर पूजा-अर्चना की. लोगों ने मां से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. इस दौरान पूरे इलाके में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा.

परंपरा को आज भी निभा रहे लोग

स्थानीय लोगों ने बताया कि कुशा अमावस्या पर यहां से कुश ले जाने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है. आज भी लोग दूर-दूर से यहां पहुंचकर इस परंपरा को निभा रहे हैं. लोगों का कहना है कि ऐसी परंपराओं से सनातन धर्म और संस्कृति से जुड़ी पुरानी मान्यताएं आगे की पीढ़ी तक पहुंचती रहती हैं.

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By Prabhat khabar news desk

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