जीविका ने मीरा देवी की बदली जिंदगी

जीविका ने मीरा देवी की बदली जिंदगी

अपनी मेहनत से बनी आत्मनिर्भर सहरसा . जिले के नवहट्टा प्रखंड के नवहट्टा ग्राम की मीरा देवी एक अतिपिछड़ी जाति की महिला है. जिनकी कहानी संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक की प्रेरक यात्रा को दर्शाती है. सीमित संसाधनों व कठिन परिस्थितियों के बावजूद मीरा देवी ने हिम्मत नहीं हारी व जीविका से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सफल रही. लगभग चार वर्ष पूर्व मीरा देवी अभिलाषा स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनी. जो जीविका ग्राम संगठन आनंद के तहत संचालित है. उनके कुल पांच बच्चे हैं एवं पति परदेश में मजदूरी कर परिवार की आजीविका चलाते हैं. पति की अनुपस्थिति एवं कम आय के कारण मीरा देवी परिवार का भरण-पोषण अत्यंत कठिनाई से कर रही थी. गरीबी के कारण बच्चों की शिक्षा एवं रोजमर्रा की जरूरतें भी बड़ी चुनौती बनी हुई थी. शराबबंदी के बाद बिहार सरकार द्वारा जीविका परियोजना के माध्यम से शराबबंदी से प्रभावित एवं अनुसूचित, अतिपिछड़ी जाति के परिवारों को सशक्त बनाने के लिए सतत जीविकोपार्जन योजना की शुरुआत की गयी. ग्राम संगठन ने मीरा देवी का चयन इस योजना के तहत किया. योजना के तहत उन्हें एलआईएफ, एलजीएएफ एवं एसआईएफ मदों से कुल 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई. इस सहायता से मीरा देवी ने अपने गांव में एक गुमटी की शुरुआत की. उन्होंने स्थानीय स्तर पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करानी शुरू किया. जिससे उनकी आमदनी प्रतिदिन लगभग दो सौ रुपये से तीन सौ रुपये हो रही है. इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है. परियोजना के सहयोग से मीरा देवी को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, नल जल, शौचालय व बिजली जैसी सरकारी सुविधाओं का भी लाभ मिला है. आज उनके बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं एवं परिवार का जीवन बेहतर दिशा में बढ़ रहा है. अपने परिश्रम एवं जीविका के सहयोग से मीरा देवी आज आत्मनिर्भर बनी है. उनकी यह सफलता ना केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है.

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लेखक के बारे में

By Dipankar shriwastaw

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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