गरीब परिवारों की रात में मुश्किल में कट रही जिंदगी

शीतलहर के बीच ठंड गरीब परिवारों के लिए आफत बनी हुई है. ऐसे लोगों का दिन तो किसी तरह कट जाता है, लेकिन रात में जिंदगी मुश्किल में कटती है.

ठंड व शीतलहर गरीब परिवारों के लिए बनी आफत,

मजदूरों को नहीं मिल रहा काम

सहरसा. शीतलहर के बीच ठंड गरीब परिवारों के लिए आफत बनी हुई है. ऐसे लोगों का दिन तो किसी तरह कट जाता है, लेकिन रात में जिंदगी मुश्किल में कटती है. इन दिनों जिले में कभी दिन में हल्की धूप तो कभी छांव के बीच शीतलहर से कंपकंपाती ठंड जारी है. शीतलहर एवं कुहासे के कारण पारा काफी कम रहता है. ऐसी सर्द भरी दिन व रात गरीब परिवारों के लिए काफी कष्टप्रद हो रहा है. सर्द भरी रात में बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन पर वाहन पकड़ने आने वाले लोग भी ठिठुरते रहते हैं. जिले में बुधवार को हल्की धूप निकली तो अधिकतम तापमान में भी बढ़ोतरी हुई. जिले में बुधवार को लगभग 18 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया. वहीं लगभग 9 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा. इधर ठंड कारण सर्दी, खांसी, बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है. अधिकांश मरीज ठंड से ग्रसित रहते हैं, लेकिन सर्द पछिया हवा ठिठुरन पैदा कर रही है. स्थानीय लोग अलाव की व्यवस्था आज तक नहीं होने तक की शिकायत कर रहे हैं. चौक-चौराहे पर लोग चुनकर लायी गयी लकड़ी, कागज, कूट जलाकर ठंड से कुछ देर के लिए राहत पा लेते हैं. ठंड से कामकाजी लोगों को खासा परेशानी झेलना पड़ रही है.

दिहाड़ी मजदूरों के काम पर पड़ रहा असर

सर्द हवाओं से बदले मौसम के मिजाज से दिहाड़ी मजदूरों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है. ठंड की वजह से मजदूरों के काम पर असर पड़ गया है. कड़ाके की ठंड में आसपास गांवों से काम की तलाश में शहर आने वाले मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है. मिस्त्री प्रमोद शर्मा, विजय कुमार ने बताया कि ठंड के कारण काम नहीं हो पा रहा है, जिससे हम लोगों को काम नहीं मिल पा रहा है. मजदूरों ने बताया कि ठंड में चादर लपेट कर कार्य की तलाश में शहर आते हैं, लेकिन काम नहीं मिलने से वापस लौट आना पड़ता है. खासकर वैसे मजदूर जो प्रतिदिन मजदूरी पर ही भोजन आपूर्ति पर निर्भर हैं, वैसे मजदूरों को काम नहीं मिलने से उनके चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं.

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By Dipankar Shriwastaw

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