नगर विकास व आवास विभाग के प्रधान सचिव ने डीएम को पत्र भेजा
सहरसा : ग्रामीण क्षेत्र की तरह शहरी क्षेत्र में भी शौचालय विहीन परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए अनुदान दिया जा रहा है. इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी नगर परिषद प्रशासन की होती है. लेकिन, नगर विकास एवं आवास विभाग ने अब इसे ‘खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ)’ अभियान में शामिल करने का फैसला लिया है. विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने इस संबंध में राज्य के सभी डीएम को पत्र लिखा है. इसके लागू होते ही शहरी क्षेत्र में अनुदान पर बन रहे शौचालयों की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी जिला जन स्वच्छता समिति की होगी. समिति के अध्यक्ष डीएम होते हैं. राज्य सरकार ने ओडीएफ योजना के तहत जिले को वर्ष 2019 तक खुले में शौचमुक्त करने का लक्ष्य है. फिलहाल इस अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों को ही शामिल किया गया है.
डीएम को लिखे पत्र में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव ने कहा है कि जिला में ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्र शामिल होते हैं. ऐसे में गांव के साथ-साथ शहरी क्षेत्र को भी शौचमुक्त नहीं कर लिया जाता है तो जिला को ओडीएफ घोषित किया जाना संभव नहीं हो पायेगा. ऐसे में ओडीएफ के लिए बनी विशेष रणनीति में शहरों को भी शामिल किया जाना चाहिए. डीडीसी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि इस फैसले से शहरों में शौचालय निर्माण की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी जिला जन स्वच्छता समिति की होगी. समिति नगर परिषद प्रशासन को तय समय सीमा में शौचालय निर्माण के लिए प्लान तय कर देगा. क्रियान्वयन पूर्व की तरह नप प्रशासन के पास ही रहेगा.
