कुव्यवस्था पर खोली जुबान, मिली धमकी
सहरसा : कोसी प्रमंडल के सुपौल जिला मुख्यालय स्थित मंडल कारा में व्याप्त भ्रष्टाचार व कुव्यवस्था की पोल खोलना जेल में तैनात चिकित्सक डॉ विमल कुमार को महंगा पड़ा है. जेल में बंद बंदियों के हित में आवाज उठाने वाले चिकित्सक को जेल अधीक्षक द्वारा जान मारने की धमकी दी जा रही है. पीड़ित डॉक्टर […]
सहरसा : कोसी प्रमंडल के सुपौल जिला मुख्यालय स्थित मंडल कारा में व्याप्त भ्रष्टाचार व कुव्यवस्था की पोल खोलना जेल में तैनात चिकित्सक डॉ विमल कुमार को महंगा पड़ा है. जेल में बंद बंदियों के हित में आवाज उठाने वाले चिकित्सक को जेल अधीक्षक द्वारा जान मारने की धमकी दी जा रही है.
पीड़ित डॉक्टर ने इसका जिक्र करते हुए विभाग के वरीय अधिकारियों को पत्र लिखा है. अधीक्षक की धमकी के बाद सहरसा के सराही मोहल्ले स्थित अपने आवास में प्रख्यात सर्जन डॉक्टर विमल कुमार सपरिवार सहमे हुए हैं.
तबादले की दी सलाह : डॉ कुमार ने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार उन्हें बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण के अलावा जेल
में बननेवाले भोजन व सफाई व्यवस्था का भी जायजा लेना होता है. यह अधीक्षक को पसंद नहीं है. अधीक्षक ने सार्वजनिक रूप से डॉक्टर को जलील करते हुए दूसरी जगह तबादला करा लेने का मशवरा दिया. इतना ही नहीं, डॉक्टर के जेल में प्रवेश करने पर भी पाबंदी लगा दी. इसके बावजूद वे अपने कर्तव्य को लेकर अड़े रहे तो अधीक्षक अमर्यादित आचरण पर उतर आये. उन्होंने जान मारने व अन्यत्र मरवाने की धमकी दे डाली.
निरीक्षण से हुआ खुलासा
डॉ विमल कुमार ने अपने पत्र में बताया है कि एक नवंबर को अपने सहकर्मी व जेल हवलदार के साथ उन्होंने जेल किचेन व वार्ड का निरीक्षण किया. इस दौरान जेल में व्याप्त कुव्यवस्था उजागर हुई. निरीक्षण में हमने पाया कि साफ-सफाई ठीक ढंग से नहीं कराने की वजह से कारा के नब्बे प्रतिशत बंदी बीमार हैं. ज्यादातर संक्रमण रोग व चर्मरोग से ग्रसित हैं. उन्होंने कहा कि किचेन के निरीक्षण के दौरान कई चौंकानेवाले साक्ष्य सामने आये. जेल मेस में घटिया क्वालिटी के दाल, चावल व मसाला की आपूर्ति की जा रही है. बंदियों को सब्जी में महज आलू के टूकड़े से संतोष करना पड़ रहा है. इतना ही नहीं, सात से आठ किलो चना दाल में मंडल कारा के लगभग तीन सौ कैदियों को भोजन रोजाना परोसने का दावा भी किया जा रहा है. डॉक्टर द्वारा इन सभी बिंदुओं की जानकारी जेल के मिनट बुक में दर्ज करा दी गयी. इसके बाद जेल अधीक्षक मिनट बुक अपने पास रख कार्रवाई की धमकी देने लगे.
जेल प्रवेश पर लगा दी पाबंदी
वरीय अधिकारी को भेजे गये पत्र में पीड़ित चिकित्सक ने बताया कि जेल अधीक्षक की मनमानी के बावजूद पुन: तीन नवंबर को ड्यूटी करने जेल जा रहे थे. इसी दौरान सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि अधीक्षक द्वारा आपके प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है. इसके बाद डॉक्टर अधीक्षक से मामले की जानकारी लेने उनके आवास पर पहुंचे. जहां उन्हें अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए पुलिस से गिरफ्तार करवाने की धमकी दी गयी. अधीक्षक ने डॉक्टर को धमकाते हुए कहा कि मैं जेल का मालिक हूं. इसके बाद उनके द्वारा दिये गये अवकाश के आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया.
बेइमानों के बीच रहना मुश्किल
डॉक्टर ने जेल आइजी, सुपौल जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के अलावा पूर्णिया सेंट्रल जेल अधीक्षक को पत्र भेज अपनी पीड़ा बतायी है. उन्होंने कहा कि राज्य के बदलते माहौल में सिविल अस्पताल की सेवा से अलग हट जेल में कार्य करने का निर्णय लिया था. लेकिन भ्रष्ट व बेइमान लोगों के बीच रह कर मानवता की सेवा करने की बजाय जान की फिक्र ही करनी होगी. उन्होंने विभाग से तबादले की गुहार लगायी है.
सुपौल मंडल कारा का मामला
सहरसा के सराही मोहल्ले के निवासी हैं डॉ विमल कुमार
जिले से लेकर राज्य मुख्यालय तक लगायी गुहार
डॉ विमल कुमार द्वारा लगाये गये सभी आरोप बेबुनियाद हैं. वह सप्ताह में दो दिन ही ड्यूटी करने आते थे. आने के बाद आधा घंटे में चले जाते थे.
सुरेश चौधरी, जेल अधीक्षक, मंडल कारा