संतान की चाह में पहुंचे अस्पताल, कर्मी ने समझा बच्चा चोर, पुलिस को सौंपा

सहरसा : बच्चे की चाह हर इंसान में होती है. एक बच्चे के लिए इंसान अपने जीवन की सारी खुशियां छोड़ कर उसे पाने की कोशिश करता है. कभी कभी तो बच्चे की चाह लोगों को हर वह काम करा देती है, जिसकी उसे जानकारी भी नहीं होती. ऐसा ही वाकया मंगलवार को सदर अस्पताल […]

सहरसा : बच्चे की चाह हर इंसान में होती है. एक बच्चे के लिए इंसान अपने जीवन की सारी खुशियां छोड़ कर उसे पाने की कोशिश करता है. कभी कभी तो बच्चे की चाह लोगों को हर वह काम करा देती है, जिसकी उसे जानकारी भी नहीं होती. ऐसा ही वाकया मंगलवार को सदर अस्पताल में देखने को मिला. जहां बेगूसराय जिला अंतर्गत बखरी सलोना के मक्खाचक गांव के रहने वाले होमियोपैथ चिकित्सक मो जसीम आलम को बच्चे की चाह ने उसे बच्चा चोर बना दिया.
पूछे जाने पर मो जसीम ने बताया कि उसकी शादी 2010 में हुई थी. लेकिन शादी के 9 वर्ष बाद भी उन्हें कोई बच्चा नहीं हुआ है. बच्चा नहीं होने के कारण लोगों के तरह तरह की ताने उनके कानों को परेशान करने लगे. जबकि वह किसी को नहीं बता पाया कि परेशानी उसमें नहीं उसकी पत्नी में है जिसके कारण बच्चा नहीं हो पा रहा है.
लेकिन घर की इज्जत को तानों से बचाने के लिए जशीम ने हमेशा लोगों के ताने सुनना बेहतर समझा. लोगों की तानों से तंग आकर जसीम ने बच्चा गोद लेने की सोची. लेकिन जसीम का बच्चा गोद लेने का तरीका गलत था. बिना किसी सही जानकारी के लोगों की बातों में आकर कि सहरसा सदर अस्पताल में बच्चा मिल जाता है. वह बच्चा लेने सदर अस्पताल सहरसा आ पहुंचा. जहां उसकी मुलाकात अस्पताल परिसर में एक आशा से हुई.
जिसे उसने अपनी परेशानी बता कर एक बच्चा उपलब्ध कराने की बात कही. जिसपर आशा ने जशीम को बच्चा चोर समझ इसकी जानकारी अस्पताल प्रशासन की दी. जिसके तुरंत बाद अस्पताल प्रशासन ने जशीम को पूछताछ के लिए अस्पताल प्रबंधक विनय रंजन के सुपुर्द कर दिया. जहां पूछताछ के क्रम में जशीम ने वही बात कही, जो बात आशा को कही थी.
जिसके बाद अस्पताल प्रबंधक ने इसकी सूचना सदर थाने को दी. कुछ देर बाद ही सदर थाने के एसआई ने सदर अस्पताल पहुंचकर मो जशीम को अपने साथ थाना ले आया. इस बाबत पूछे जाने पर सदर थानाध्यक्ष राजमणि ने बताया कि किसी ने उसके खिलाफ शिकायत नहीं की है. बस उसे थाने में लाकर छोड़ दिया गया है.

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