कलाभवन साहित्य विभाग के तत्वावधान में महादेवी वर्मा की कविताओं पर चर्चा
करुणा में रसानुभूति के भाव को जगाती हैं महादेवी की कविताएं : डॉ प्रभात नारायण
पूर्णिया. कलाभवन साहित्य विभाग के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में महीयसी महादेवी वर्मा की कविताओं पर सार्थक चर्चा की गयी. इस मौके पर हिंदी विभाग पूर्णिया विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं महादेवी वर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शोध करने वाले डॉ. कामेश्वर पंकज ने महादेवी वर्मा को विराट् कल्पना से ओतप्रोत आध्यात्मिक स्त्री शक्ति बताया. उन्होंने कहा कि उनका काव्य शाश्वत मूल्यों का काव्य है. इनमें करुणा वेदना और रहस्य के सुंदर आवरण में प्रभु से मिलन की विरह वेदना है. महादेवी ने जिन शाश्वत जीवन मूल्यों की बात कविता में की है वह हमारा औपनिषदिक ज्ञान ही तो है जब तक उपनिषदों का अस्तित्व हमारे जीवन में है महादेवी की कविताएं हमारे मन में रहेंगी. डाॅ पंकज ने कहा कि उनकी कविता का क्षेत्र है आत्मा और परमात्मा. चार कविता संग्रह का सम्मिलित संग्रह यामा अत्यंत प्रसिद्ध है इसमें विराट जीवन दर्शन समाहित है. चार भाग जीवन के चार आयाम हैं, निहार रश्मि नीरजा और सांध्यगीत. डाॅ पंकज ने चारों खंड की कविताओं पर सारगर्भित वक्तव्य दिये.
साहित्यिक संगोष्ठी में इससे पहले दीप जला कर उद्घाटन किया गया. फिर, महादेवी वर्मा के चित्र पर पुष्पांजलि के पश्चात समारोह का शुभारंभ हुआ. साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने आगत अतिथियों का स्वागत किया. डॉ. कामेश्वर पंकज संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे. संगोष्ठी में बीज वक्तव्य मुख्य अतिथि डॉ. प्रभात नारायण झा ने दिया और महादेवी को हिंदी साहित्य की स्थापित कवयित्री वेदना की साम्राज्ञी बताते हुए करुणा की मुख्य गायिका बताया. उन्होंने कहा कि करुणा ही वह तत्व है जो कविताओं में प्राण प्रतिष्ठा करता है और महादेवी जी तो करुणा में रसानुभूति के भाव को जगाती हैं. सभी कविताएं गेय हैं और जब स्वयं के दुख को वे विश्व से जोड़कर लिखती हैं तो वह सशक्त सकारात्मक और रागात्मक ताकत बन जाती है . महादेवी का काव्य बौद्ध दर्शन की गीतात्मक अभिव्यक्ति है. कबीरवाद और सूफीवाद के बाद प्रतिष्ठित है महादेवी का रहस्यवाद जो प्रकृति और जीवन से प्रेम करना सिखाता है. हम जितना महादेवी को पढ़ेंगे उतना अपने भीतर कविता की दीप शिखा को फिर से प्रज्वलित करेंगे.