मातृ-शिशु सुरक्षा का मूलमंत्र : समय पर देखभाल

पोषण सहायता वितरण कार्यक्रम का आयोजन

उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण सहायता वितरण कार्यक्रम का आयोजन

पूर्णिया. बुधवार को जिले के इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, पूर्णिया परिसर में उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष पोषण सहायता वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने की. इस मौके पर जिला पदाधिकारी ने कहा कि उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय पर पहचान और समुचित प्रबंधन मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक गर्भवती महिला को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित जांच, संस्थागत प्रसव तथा पर्याप्त पोषण सहायता उपलब्ध करायी जाये.किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है और सभी संबंधित पदाधिकारियों को इस दिशा में संवेदनशील एवं सक्रिय रहना होगा. इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) सोरेंद्र कुमार दास, शिव शेखर आनंद, यूनिसेफ सहित स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी,आशा एवं एएनएम कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी महिलाएं मौजूद थीं. इस दौरान लाभार्थियों के बीच पोषण किट (फूड पैकेट) का वितरण किया गया. इसमें आवश्यक पोषक तत्वों से युक्त सामग्री शामिल थी.साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसव पूर्व जांच , आयरन-फोलिक एसिड एवं कैल्शियम का सेवन, टीकाकरण तथा संस्थागत प्रसव (स्वास्थ्य संस्थान में सुरक्षित प्रसव) के महत्व के बारे में विशेष रूप से जागरूक किया गया.जिला पदाधिकारी द्वारा विशेष रूप से यह भी बताया कि गर्भवती महिलाओं की समुचित जांच एवं परामर्श के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत प्रत्येक माह की 9, 15 एवं 21 तारीख को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क जांच एवं परामर्श की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है. सभी गर्भवती महिलाओं से अपील की गई कि वे इन तिथियों पर अवश्य अपनी जांच कराएं तथा प्रसव के लिए पहले से ही नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान का चयन सुनिश्चित करें

सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि जिले में सभी उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनकी लाइन लिस्टिंग की जा रही है तथा विशेष दिवसों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच सुनिश्चित की जा रही है. जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) सोरेंद्र कुमार दास, ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर संपर्क कर महिलाओं की नियमित निगरानी की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर एम्बुलेंस (102) सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि समय पर उन्हें स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाया जा सके और संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जा सके।

वर्तमान गर्भावस्था में जटिलताएं :

गर्भ में शिशु की हलचल कम होना, अत्यधिक सूजन, तेज सिरदर्द या धुंधला दिखना, योनि से खून या पानी का रिसाव, समय से पहले प्रसव पीड़ा, जुड़वा या एक से अधिक गर्भ, असामान्य भ्रूण स्थिति.

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By ARUN KUMAR

ARUN KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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