विकारों को त्याग दिव्य गुणों को अपनाने का निमंत्रण है मेला : बीके मुकुट मणि

ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला में ज्योतिर्लिंगों के आध्यात्मिक रहस्य पर चर्चा

ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला में ज्योतिर्लिंगों के आध्यात्मिक रहस्य पर चर्चा

ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला के तीसरे दिन भी उमड़ी श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़

पूर्णिया. प्रजापिता ब्राह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय जिला शाखा की मुख्य संचालिका बीके मुकुट मणि ने कहा है कि परमात्मा शिव इस धरा पर अज्ञानता के अंधकार को मिटाने और सत्य का प्रकाश फैलाने अवतरित होते हैं. यह मेला केवल दर्शन मात्र नहीं है बल्कि अपने भीतर के विकारों को त्याग कर दिव्य गुणों को धारण करने का एक निमंत्रण है. प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा ही परमात्मा शिव मनुष्य आत्माओं के पिता, शिक्षक सदगुरु के रूप में हैं और सहज गीता ज्ञान अथवा सहज राजयोग सिखाकर उनकी सद्गति करते हैं अर्थात उन्हें जीवन मुक्ति देते हैं. ज्योतिर्लिंगों के आध्यात्मिक रहस्य को उन्होंने अलग-अलग तरीके से समझाया. मुख्य संचालिका बीके मुकुट मणि टैक्सी स्टैंड के नजदीक राजस्थान सेवा समिति भवन परिसर में आयोजित द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला के तीसरे दिन मंगलवार को बोल रही थीं. उन्होंने कहा कि कलयुग के अंत में प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा सतयुगी देवी सृष्टि की स्थापना के साथ परमपिता परमात्मा शिव पुरानी आसुरी सृष्टि का महाविनाश कर देते हैं. वह देह अभिमानी , धर्म भ्रष्ट्र तथा विपरीत बुद्धि वाले लोगों को महाभारत की भाषा में कौरव कहा जाता है . भगवान विष्णु के चार भुजाओं में से दो भुजाएं श्री नारायण की और दो भुजाएं श्री लक्ष्मी की प्रतीक है. उनके पवित्र वचन अथवा ज्ञान घोष की निशानी है. उन्होंने कहा कि सुदर्शन चक्र तथा सृष्टि चक्र ज्ञान का प्रतीक है . कलियुग संसार में रहते हुए पवित्र रहने का सूचक तथा गदा माया पर विजय ,पांच विकारों पर विजय का चिह्न है. अतः मनुष्य आत्माओं के सामने विष्णु चतुर्भुज का लक्ष्य रखते हुए परमपिता परमात्मा शिव समझाते हैं. इन अलंकारों को धारण करने से इनके रहस्य को अपने जीवन में उतारने से श्री नारायण और नई श्री लक्ष्मी पद प्राप्त कर लेती है. उन्होंने खुशनुमा जीवन के लिए राजयोग मेडिटेशन विषय पर बताया कि वर्तमान समय मेडिटेशन की आवश्यकता है.

मेला में पूरे दिन लगी रही श्रद्धालुओं की भीड़

शहर में आयोजित द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला के तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. आलम यह है कि इस आध्यात्मिक प्रदर्शनी ने पूरे शहर को शिवमय कर दिया है. शहर के विभिन्न सामाजिक संगठन के लोग एवं आम लोग द्वादस ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं. राजस्थान सेवा समिति भवन परिसर में प्रदर्शनी स्थल पर बनाए गए दिव्य स्वरूप देख भक्त मोहित हो रहे हैं. श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बारी-बारी से ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए और शांति की अनुभूति की. श्रद्धालुओं के बीच ब्रह्माकुमारी बहनों और भाइयों द्वारा ईश्वरीय सौगात और प्रसाद का वितरण भी किया गया. दर्शन करने पहुंचे लोगों का कहना है कि इस तरह के आयोजन से न केवल धार्मिक आस्था को बल मिलता है बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मकता का संचार भी होता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By AKHILESH CHANDRA

AKHILESH CHANDRA is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >