रेणु की मार्मिक कहानी पर आधारित नाटक का प्रभावोत्पादक मंचन
दर्शकों को भीतर तक झकझोर गयी नाटक के सभी पात्रों की जीवंतता
पूर्णिया. पूर्णिया नव निर्माण मंच द्वारा आयोजित रेणु महोत्सव के अवसर पर पूर्णिया के बुद्धा विजडम वर्ल्ड सोसाइटी, मिल्की रंगपुरा के कलाकारों ने रेणु जी की चर्चित और लोकजीवन से जुड़ी कहानी ‘महुआ घटवारिन’ पर आधारित नाटक का प्रभावोत्पादक मंचन किया. बीते रविवार के देर शाम नाट्य मंचन के इस आयोजन में कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से समां बांध दिया. रेणु साहित्य की सबसे मार्मिक और संवेदनशील कहानियों में गिनी जाने वाली ‘महुआ घटवारिन’ ग्रामीण जीवन की पीड़ा, सामाजिक विसंगतियों और मानवीय संवेदनाओं का गहरा चित्रण करती है. इसी संवेदनशील कथा को रंगमंच की भाषा में ढालते हुए कलाकारों ने जीवंत कर दिया. मंच पर महुआ के संघर्ष, पीड़ा और बेबसी को जिस भावनात्मकता के साथ प्रस्तुत किया गया, उसने दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया. कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं और सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा.
इस नाटक में समाज में व्याप्त लालच, ईर्ष्या, स्वार्थ और स्त्री के शोषण जैसे गंभीर सामाजिक प्रश्नों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उठाया गया है. महुआ के चरित्र के माध्यम से यह दिखाया गया कि कैसे परिस्थितियों और सामाजिक संरचनाओं के बीच एक स्त्री का जीवन संघर्षों से घिर जाता है. कलाकारों ने इन भावनाओं को इतनी सजीवता से मंच पर प्रस्तुत किया कि दर्शक स्वयं को कहानी के भीतर महसूस करने लगे. यह प्रस्तुति भिखारी ठाकुर सम्मान व संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित मिथिलेश राय के दिशा निर्देश में रजनीश आर्या ने नाटक का निर्देशन किया गया. निर्मल कुमार राम ने सह-निर्देशक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. मंचीय प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में विशाल कुमार के इलेक्ट्रॉनिक संगीत ‘याह’ और निर्मल कुमार राम के लाइव म्यूजिक ने विशेष योगदान दिया. संगीत के उतार-चढ़ाव ने नाटक के विभिन्न भावों-दुख, करुणा, तनाव और संवेदना को और अधिक गहराई प्रदान की. मंच सज्जा सागर कुमार दास द्वारा की गयी थी जिसमें ग्रामीण परिवेश को अत्यंत सजीव और वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया गया. मंच पर गांव का वातावरण, नदी घाट का दृश्य और लोकजीवन की झलकियों ने दर्शकों को सीधे उस दुनिया में पहुंचा दिया, जिसकी कल्पना रेणु ने अपनी कहानी में की थी.