सरकार के निर्देश पर हरकत में आया नगर निगम, गठित की गई टीम
हटायी जाएंगी मुख्य मार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर मटन-मुर्गा की दुकानें
पूर्णिया. सरकार के आदेशानुसार अब खुले में मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगेगी. खुले में मांस-मछली की बिक्री पर नगर निगम के के तेवर सख्त दिख रहे हैं. नगर निगम ने इस पर पाबंदी लगाने का फैसला लिया है. बुधवार 25 फरवरी से इसके लिए अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान के तहत शहर के मुख्य मार्गों और सार्वजनिक स्थलों के किनारे अवैध रूप से चल रही मटन, मुर्गा और मछली की दुकानों को न केवल हटाया जाएगा बल्कि जब्ती की कार्रवाई भी की जाएगी. नगर निगम कीओर से पहले ही इसके लिए अल्टीमेटम दे दिया था. मगर, इसके बावजूद सड़क किनारे सार्वजनिक स्थलों से दुकानें हटाने की जहमत नहीं उठायी गई. यही वजह है कि नगर निगम ने अवैध रूप से चल रही मटन, मुर्गा और मछली की दुकानों को हटाने की तैयारी कर ली है.
दरअसल, स्वच्छता और जनस्वास्थ्य को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री विजय सिन्हा की घोषणा के बाद नगर निगम हरकत में आया. इसके लिए पहले शहर के सभी प्रमुख सड़कों का सर्वे कर ऐसी दुकानों की सूची तैयार कर अल्टीमेटम जारी किया गया फिर अभियान चलाने का निर्णय लिया. नगर निगम ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए कमर कस लिया है. नगर आयुक्त कुमार मंगलम के निर्देश पर अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया गया है, यह टीम पुलिस बल के साथ शहर के विभिन्न वार्डों और चौक-चौराहों पर कार्रवाई करेगी. यह टीम बिना किसी रियायत के सीधे जब्ती और हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगी. निगम प्रशासन की मानें तो सड़क किनारे खड़ी भीड़ और दुकानों के कारण लगने वाले जाम से आम जनता को निजात दिलाना है. खुले में मांस की बिक्री से फैलने वाली गंदगी और बीमारियों के खतरे को कम करना है.डेढ़ सौ से अधिक अवैध दुकानें संचालित
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शहर के मुख्य सड़क और सार्वजनिक स्थलों पर तकरीबन डेढ़ सौ से अधिक अवैध रूप से मांस, मुर्गा व मछली की दुकानें संचालित है. ज्ञात हो कि नगर निगम क्षेत्र के मधुबनी बाजार से मझेली चौक, लाइन बाजार, जनता चौक, गुलाबबाग, खुश्कीबाग समेत कई बाजारों में सड़क किनारे खुले में मांस-मछली बिक्री की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं. जबकि नगर निगम द्वारा मधुबनी, खुश्कीबाग व भट्ठा बाजार में बूचड़खाना अधिकृत है. इसके लिए बजाप्ता हर वित्तीय वर्ष में निविदा निकाली जाती है. अव्वल तो यह है कि शहर के घनी आबादी वाले मुहल्लों और गलियों में भी मटन की दुकानें चल रही हैं.————
