पूर्णिया में असीम आस्था का केंद्र है रजनी चौक शनि मंदिर, सुबह खीर तो शाम को बंटता है खिचड़ी का महाभोग

Rajni Chowk: पूर्णिया शहर के रजनी चौक पर स्थित साढ़े चार दशक पुराना शनि देव मंदिर जिलावासियों की अगाध श्रद्धा का मुख्य केंद्र बना हुआ है, यहाँ हर शनिवार को सुबह से लेकर देर शाम तक न्याय के देवता के दर्शन और विशेष अनुष्ठान के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है.

पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट

Rajni Chowk: बिहार के पूर्णिया जिला मुख्यालय अंतर्गत रजनी चौक पर अवस्थित भगवान शनिदेव का पावन मंदिर शहरवासियों सहित पूरे जिले के लोगों की आस्था का एक बड़ा स्तम्भ है, प्रत्येक शनिवार को इस मंदिर परिसर में एक अलग ही आध्यात्मिक रौनक देखने को मिलती है, यहाँ जिले के कोने-कोने से श्रद्धालु अपने ग्रहों की शांति, पारिवारिक खुशहाली और सुख-समृद्धि की मंगल कामना लेकर पहुँचते हैं, भक्तों का ऐसा अटूट विश्वास है कि यह धाम जिले का एक ऐसा पवित्र स्थान है, जहाँ कदम रखते ही दीन-दुखिया भगवान शनि की विशेष कृपा का पात्र बन जाता है और उसके जीवन के सारे कष्ट धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं.

भोग लगाने की है अनूठी परंपरा, भक्तों में बंटता है महाप्रसाद

रजनी चौक शनि धाम अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपराओं और भोग व्यवस्था के लिए भी काफी प्रसिद्ध है, जो श्रद्धालुओं को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है:

  • सुबह का विशेष भोग: हर शनिवार की सुबह मंदिर में भगवान शनिदेव का विशेष पूजन-अर्चन किया जाता है, जिसके बाद उन्हें शुद्ध दूध और चावल से बनी खीर का भोग लगाया जाता है.
  • शाम का महाप्रसाद: संध्या आरती के उपरांत भगवान को स्वादिष्ट खिचड़ी का महाभोग लगाया जाता है, मंदिर कमेटी द्वारा यहाँ आने वाले हर एक श्रद्धालु के लिए खिचड़ी महाप्रसाद के विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जो देर रात तक अनवरत चलता रहता है.

साढ़े चार दशक पुराना है इतिहास, सिंगनापुर की शिला जैसी है मान्यता

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: स्थानीय पुरोहितों और बुजुर्गों के अनुसार, इस भव्य मंदिर का इतिहास करीब साढ़े चार दशक पुराना है, अस्सी के दशक (1980s) में इस मंदिर की स्थापना बेहद छोटे स्तर पर की गई थी, शुरुआत में यहाँ सिर्फ एक सामान्य भवन और चबूतरा निर्मित था, लेकिन समय के साथ भक्तों के सहयोग से इसे आधुनिक और बेहद आकर्षक लुक दिया गया है, मंदिर के मुख्य गर्भगृह के चबूतरे पर भगवान शनिदेव की अत्यंत मनोहारी और तेजस्वी प्रतिमा स्थापित है.

सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर में स्थापित शनिदेव के विग्रह को स्थानीय श्रद्धालु महाराष्ट्र के विश्व प्रसिद्ध ‘शनि शिंगणापुर’ की पावन शिला की दृष्टि और महिमा के रूप में पूजते हैं, यही कारण है कि मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, इसके अलावा, हर साल 4 अगस्त को मंदिर का भव्य वार्षिकोत्सव (Anniversary) बेहद धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें विशाल कीर्तन और भंडारे का आयोजन होता है.

दर्शन और पूजन का विशेष समय

यदि आप भी रजनी चौक स्थित शनि दरबार में हाजिरी लगाना चाहते हैं, तो निम्नलिखित जानकारियों का ध्यान रख सकते हैं:

  • शनिवार को विशेष भीड़: यूँ तो मंदिर में रोजाना श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं, लेकिन शनिवार को सुबह की पहली किरण के साथ ही पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है, भक्त कतारों में खड़े होकर शनिदेव की छवि पर सरसों का तेल, काले तिल, उड़द और नीले वस्त्र अर्पित करते हैं.
  • पहुँचने का मार्ग: यह मंदिर पूर्णिया शहर के प्रमुख चौराहे रजनी चौक पर ही स्थित है, जहाँ ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहनों के जरिए बेहद आसानी से पहुँचा जा सकता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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