पूर्णिया यूनिवर्सिटी को पटना हाईकोर्ट का सख्त निर्देश: 30 दिनों के भीतर जारी करें पीएचडी का पेंडिंग रिजल्ट

पूर्णिया विश्वविद्यालय को पीएचडी रिजल्ट रोकने पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा आदेश दिया है. थीसिस और वाइवा के बाद भी परिणाम लंबित रखने पर कोर्ट ने विश्वविद्यालय को 30 दिन में रिजल्ट जारी करने को कहा है. कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की.

पीएचडी थीसिस जमा करने और मौखिक परीक्षा (वाइवा-वोस) संपन्न होने के बावजूद शोधार्थी का परिणाम लंबित रखने के मामले में पटना उच्च न्यायालय ने पूर्णिया विश्वविद्यालय प्रशासन को समय-सीमा के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. अदालत ने आदेश की प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता शोधार्थी का पीएचडी परिणाम घोषित करने को कहा है, बशर्ते कोई अन्य कानूनी या प्रशासनिक अड़चन न हो.

शिक्षा के अधिकार में समय पर परिणाम जारी करना भी शामिल

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार के दायरे पर चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार केवल निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा में शामिल होने तक सीमित नहीं है. निर्धारित अवधि या उचित समय-सीमा के भीतर परिणाम जारी करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है.

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक देरी या अनिर्णय के कारण किसी शोधार्थी के भविष्य और करियर को अनिश्चित स्थिति में नहीं रखा जा सकता.

27 सितंबर 2024 को जमा की थी थीसिस

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शोधार्थी ने प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पूर्णिया विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए पंजीकरण कराया था. शोधार्थी ने 27 सितंबर 2024 को पीएचडी थीसिस की हार्ड कॉपी, पीपीटी की सॉफ्ट कॉपी और सभी आवश्यक दस्तावेज पीजी विभाग में जमा कर दिए थे.

इसके बाद 18 जनवरी 2025 को शोधार्थी का वाइवा-वोस भी संपन्न हो गया. सभी आवश्यक शैक्षणिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद परिणाम जारी नहीं किया गया, जिसके बाद मामला उच्च न्यायालय के समक्ष पहुंचा.

थीसिस जमा करने से छह महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का उल्लेख

सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष यूजीसी और उच्च शिक्षण संस्थानों से संबंधित नियमों का उल्लेख किया गया. इसमें थीसिस जमा करने की तिथि से अधिकतम छह महीने के भीतर मूल्यांकन, वाइवा-वोस और अंतिम परिणाम की घोषणा समेत प्रक्रिया पूरी करने के प्रावधान की बात कही गयी. अदालत ने मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए विश्वविद्यालय स्तर पर परिणाम लंबित रहने की स्थिति को लेकर आवश्यक निर्देश जारी किए.

कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक को जांच का निर्देश

उच्च न्यायालय ने पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक को पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि यदि कोई अन्य कानूनी या प्रशासनिक बाधा नहीं है तो आदेश की प्रति प्रस्तुत होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता का पीएचडी परिणाम अधिमानतः घोषित किया जाए.

परीक्षा नियंत्रक ने कहा, आदेश पर नियमानुसार कार्रवाई होगी

हाईकोर्ट के निर्देश के संबंध में पूर्णिया विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. जमीरूल आलम ने बताया कि मामले में जारी दिशा-निर्देश की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को मिल चुकी है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय आदेश को गंभीरता से ले रहा है. मामले के तकनीकी, कानूनी और शैक्षणिक पहलुओं की जांच कर नियमानुसार समय-सीमा के भीतर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है.

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लेखक के बारे में

By अभिषेक भास्कर

अभिषेक भास्कर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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