पूर्णिया. सखी बहिनपा मैथिलानी समूह की सखियों ने जितिया उत्सव मनाया . पूर्णिया इकाई की प्रभारी सुषमा झा ने कहा कि सखी बहिनपा मैथिलानी समूह अपनी संस्कृति के संरक्षण के लिए संकल्पित है. हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी संस्था ने जितिया उत्सव का आयोजन समारोहपूर्वक आयोजित किया . मिथिला में जितिया व्रत का काफी महत्व है. अपने संतान के दीर्घायु एवं अपने सौभाग्य के लिए किया जाने वाला यह व्रत तीन दिनों का होता है. पहले दिन नहाय खाय से आरंभ होता है. उस दिन सरसो तेल एवं सरसो की खल्ली को झिगुनी के पत्ते पर चढ़ा कर जीमूतवाहन की पूजा की जाती है. दूसरे दिन निर्जला रहकर ये व्रत माताएं करती हैं . इस व्रत में आचमन करना भी वर्जित रहता है. शाम के वक्त चील्ह-सियारनी की कथा सुनी जाती है. कभी-कभी यह व्रत 36 घंटे का भी होता है.फिर तीसरे दिन स्नान कर पूजा के बाद ब्राह्मण भोजन कराने के बाद ही माताएं अन्न जल ग्रहण करती हैं . इस अवसर पर समारोह की साक्षी नवटोल-मधुबनी से आयी ईला मिश्रा को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया.मौके पर पूर्णिया समूह की सखियों में रूणा झा, नीलम झा, साधना चौधरी, सुनीता सर्राफ, नूतन ठाकुर, लवली झा, नूतन सिंह , प्रीति सिंह ,अदीति आदि अन्य सखियों की भागीदारी रही .
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