पूर्णिया : अगर आप पूर्णिया में हैं तो मां पूर्णेश्वरी काली मंदिर में दर्शन जरूर करें. जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर सौरा नदी के तट पर स्थित यह करीब ढाई सौ साल पुराना मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां रोजाना बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.
अमावस्या पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
मंदिर में हर अमावस्या की रात विशेष पूजा-अनुष्ठान होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से माता की पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है. नवरात्र के दौरान भी मंदिर में विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं.
बिहार, बंगाल और नेपाल से पहुंचते हैं भक्त
मां पूर्णेश्वरी काली मंदिर पूर्णिया शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है. मंदिर के प्रति स्थानीय लोगों की गहरी आस्था है. यहां बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल और नेपाल से भी श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. कई लोग किसी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले माता का आशीर्वाद लेने मंदिर आते हैं.
सौरा नदी के तट पर शांत वातावरण
सौरा नदी के किनारे स्थित मंदिर का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अहसास कराता है. भक्तों का मानना है कि यहां पूजा-अर्चना से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. लंबे समय से यह मंदिर पूर्णिया की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बना हुआ है.
