सरहुल पर्व : पारंपरिक भव्यता के साथ संपन्न हुआ प्रकृति पूजा का उत्सव

मंत्री लेशी सिंह व विधायक विजय खेमका ने किया समारोह का उद्घाटन

मंत्री लेशी सिंह व विधायक विजय खेमका ने किया समारोह का उद्घाटन

पूर्णिया. शहर के गिरजा चौक के नजदीक राजेन्द्र बाल उद्यान में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने वाले प्रकृति पर्व सरहुल बाहा पूजा महोत्सव का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ किया गया. बिहार सरकार के कला संस्कृति और जिला प्रशासन की ओर से आयोजित राजकीय समारोह का उद्घाटन मंत्री लेशी सिंह ने विधायक विजय खेमका, कटोरिया के विधायक पुरन लाल टुड्डू, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष शैलेन्द्र गढ़वाल, जदयू के प्रदेश महासचिव आशीष कुमार बब्बू, महानगर अध्यक्ष अविनाश कुमार, सरहुल पूजा समिति के अध्यक्ष मायारांव उरांव एवं अन्य अतिथियों के साथ संयुक्त रूप से किया. इस अवसर पर प्राकृतिक व कृषि से जुड़े कलाकारों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किए. इससे पहले आदिवासी समाज के लोगों ने राजेन्द्र बाल उद्यान में सरना स्थल पर पाहन (पुजारी) द्वारा साल वृक्ष की पूजा कर प्रकृति से सुख-समृद्धि की कामना की. इसमें सांसद पप्पू यादव भी शामिल हुए. शनिवार को आदिवासी समाज के लोगों ने पहले राजेन्द्र बाल उद्यान स्थित ‘सरना स्थल’ पर एकत्र होकर सखुआ के फूलों और पल्लवों से पूजा-अर्चना की. इस दौरान आदिवासी समाज के लोग एक दूसरे को अबीर गुलाल लगा कर और सखुआ के फूल बाल में लगा कर खुशी जाहिर की. इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर ढोल-नगाड़ों और मांदर की थाप पर नृत्य भी किया जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय हो गया. इससे पहले झील टोला फुटबॉल मैदान से गिरजा चौक समारोह स्थल तक भव्य शोभायात्रा निकाली गयी. समारोह का मंच संचालन राजेश गोस्वामी कर रहे थे. इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव कुमार, सरहुल पूजा समिति के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर उरांव, विक्रम तिर्की, धर्मेंद्र उरांव, बबलू उरांव, धनेश उरांव, सचिव बीरेंद्र उरांव, उप सचिव हरि कुजूर, राजेन्द्र उरांव, विकाश सोरेन, मनोज कुजूर, कोषाध्यक्ष शुभमं उरांव, उप कोषाध्यक्ष मुकेश कुजूर , संजय सोरेन, अजय उरांव,सरहुल पूजा समिति के कोषाध्यक्ष शुभम आनंद आदि मौजूद थे.

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है सरहुल: लेशी सिंह

समारोह को संबोधित करती हुई मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि सरहुल पूजा हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है. यह पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण और आपसी प्रेम-भाईचारे का संदेश देता है. सरहुल केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है. इस दिन सभी लोग जाति-धर्म से ऊपर उठकर एक साथ मिलकर खुशियां मनाते हैं. मंत्री लेशी सिंह ने आदिवासी समाज को अपनी शुभकामनाएं दीं और उनकी संस्कृति की सराहना की.

आदिवासी समाज के सम्मान का प्रतीक: खेमका

विधायक विजय खेमका ने इस बात पर जोर दिया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरहुल को राजकीय महोत्सव का दर्जा मिलना आदिवासी समाज के सम्मान का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों और जल-जंगल-जमीन के महत्व को समझ सकेंगी. सरहुल हमें सिखाता है कि हम प्रकृति के बिना अधूरे हैं. यह महोत्सव सामाजिक एकता और भाईचारे का अनूठा उदाहरण पेश करता है.

प्रकृति, सूर्य व धरती के मिलन का पर्व: टुड्डू

कटोरिया के विधायक पुरन लाल टुड्डू ने कहा कि सरहुल केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आपसी भाईचारे और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प है. सरहुल उत्सव: प्रकृति, सूर्य और धरती के मिलन का पावन पर्व है. प्रकृति पर्व सरहुल पूरे आदिवासी समाज के लिए आस्था, संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है. यह पर्व सूर्य और धरती के विवाह के रूप में मनाया जाता है, जो जीवन, हरियाली और नवजीवन का संदेश देता है.

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