12 सितंबर को लगेगी वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत, तैयारियों को लेकर प्रधान जिला जज ने की बैठक

12 सितंबर 2026 को पूर्णिया में वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने लोक अदालत को सफल बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं. इसका मुख्य उद्देश्य पक्षकारों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के त्वरित न्याय दिलाना है.

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) नई दिल्ली और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) पटना के निर्देशानुसार आगामी 12 सितंबर 2026 को पूर्णिया जिले में वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा. यह आयोजन पूर्णिया व्यवहार न्यायालय परिसर के साथ-साथ अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय बनमनखी, धमदाहा और बायसी में भी एक साथ होगा. लोक अदालत को सफल बनाने और अधिक से अधिक मुकदमों के निष्पादन के उद्देश्य से मंगलवार को एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई.

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई बैठक

व्यवहार न्यायालय पूर्णिया के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) कन्हैया जी चौधरी ने की.

बैठक में विभिन्न न्यायालयों के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM), अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (ACJM), न्यायिक दंडाधिकारी तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव सहित कई न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे.

लोक अदालत की सफलता के लिए दिए गए मुख्य दिशा-निर्देश

  1. मामलों का चिह्नीकरण: प्रधान जिला जज ने सभी न्यायिक अधिकारियों को अपने-अपने न्यायालयों में लंबित सुलहनीय (Compoundable Cases) और पूर्व वाद (Pre-litigation Cases) मुकदमों को तेजी से चिह्नित करने का निर्देश दिया.
  2. समय पर नोटिस तामिला: संबंधित पक्षकारों और पीड़ितों को समय रहते आधिकारिक नोटिस भेजने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया.
  3. प्री-लोक अदालत बैठकें: लोक अदालत की तिथि से पूर्व ही पक्षकारों के बीच 'प्री-लोक अदालत' बैठकों का आयोजन कर आपसी सहमति से विवाद सुलझाने पर जोर दिया गया.

त्वरित और सुलभ न्याय का माध्यम

बैठक के दौरान बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य पक्षकारों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च और लंबे इंतजार के त्वरित न्याय दिलाना है. लोक अदालत में आपसी सहमति और समझौते के आधार पर निपटाए गए मामलों में किसी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, जिससे आपसी सौहार्द बना रहता है.


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लेखक के बारे में

By अरुण कुमार

अरुण कुमार प्रिंट माध्यम में 32 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर के पूर्णिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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